कोलकाता में खुला एनआईए का पहला विशेष थाना (AI जनरेटेड इमेज)
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Explainer: कोलकाता में खुला NIA का पहला विशेष थाना, जानें कौन-कौन से मामलों की जांच करती है एजेंसी?

National Investigation Agency: कोलकाता में एनआईए के पहले विशेष थाने की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सुरक्षा मामलों की जांच तेज होगी। जानिए यह थाना क्यों खोला गया, कैसे काम करेगा और इसके अधिकार क्या हैं।

अक्षय साहू

NIA Kolkata Police Station: नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने हाल ही में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अपना पहला विशेष थाना खोला है। NIA का यह विशेष थाना न्यू टाउन स्थित एनबीसीसी भवन में बनाया गया है। अब इस थाने में पश्चिम बंगाल से जुड़े NIA मामलों की एफआईआर दर्ज की जा सकेगी। हालांकि, यह फैसला यह थाना नहीं करेगा कि किस मामले की एफआईआर यहां दर्ज होगी और किसकी नहीं?

NIA का नाम पिछले कुछ सालों में तेजी से उभरकर सामने आया है। मामले चाहे आतंकवाद का हो या फिर अवैध संपत्ति की जांच का, हर बार एनआईए की भूमिका निभाती नजर आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बिना किसी थाने के NIA हर बड़े मामले की जांच करती है, तो फिर उसे पश्चिम बंगाल में अपना विशेष थाना क्यों खोलना पड़ा? NIA का नया थाना कैसे काम करेगा? और एनआईए कौन-कौन से मामलों की जांच करती है?

नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी क्या है?

नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी है। एनआईए का गठन 2008 में काग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने किया। दरअसल 2008 में मुंबई आतंकी हमलों के बाद देश में ऐसी केंद्रीय जांच एजेंसी की कमी महसूस हुई, जो उन गंभीर मामलों की जांच करे जिनका संबंध देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता से हो।

देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच करती है एनआईए

एनआईए ऐसे मामलों की जांच करती है, जिनका संबंध एक से अधिक राज्यों या दूसरे देशों से जुड़ा होता है। हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि किसी मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस करती है और बाद में केंद्र सरकार उसे एनआईए को सौंप देती है। इसके बाद एजेंसी अपने स्तर पर जांच को आगे बढ़ाती है।

एनआईए के गठन की जरूरत क्यों पड़ी?

2008 में जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ तब सरकार के सामने कई चुनौतियां थीं। इसके अलावा भारत में आतंकवाद और संगठित अपराध लगातार अपना स्वरूप बदल रहे थे। कई घटनाएं ऐसी हो रही थी जिनकी प्लानिंग एक राज्य में हो रही थी और उसे अंजाम दूसरे राज्यों में दिया जा रहा था। जिनका संबंघ विदेशी संगठनों से भी होता था।

2008 में मुंबई हमलों के बाद की गई थी एनआईए की स्थापना

ऐसे मामलों की जांच के लिए स्थानीय पुलिस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता था। जांच के लिए पुलिस को अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता था। विदेशी एजेंसियों से भी संपर्क करना पड़ सकता था। केंद्र सरकार ने इसी कमी को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 बनाया। इसी के तहत एनआईए की स्थापना हुई।

किन मामलों की जांच करती है एजेंसी

सामान्य शब्दों में कहा जाए नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी हर उस मामले की जांच करती है जिसका संबंध देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता से होता है। इसमें आतंकवाद से जुड़े मामले, हथियारों और विस्फोटक की तस्करी से जुड़े मामले, नकली भारतीय मुद्रा (करेंसी) , सीमा पार से घुसपैठ और तस्करी से जुड़े मामले, वामपंथी उग्रवाद और अलगाववादी गतिविधियां, अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जुड़े अपराध और परमाणु और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़े अपराध के मामले शामिल हैं।

देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता से जुड़े मामलों की जांच करती है NIA

एनआईए की जांच का दायरा काफी बड़ा है। एजेंसी जमीनी स्तर के साथ ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले अपराधों की जांच करती है। एजेंसी के अधिकतर मामले देश की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। ऐसे में एजेंसी केवल गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है, क्योंकि देश की अंदरूनी सुरक्षा का जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के पास ही होता है।

बंगाल में क्यों पड़ी NIA थाना की जरूरत?

कोलकाता में एनआईए का थाना खुलने से राज्य में कई बड़े बदलाव होने की संभावना है। अब एजेंसी को हर बात के लिए दिल्ली मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इससे पहले पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों में कई औपचारिकताओं के लिए एजेंसी के दिल्ली पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें अधिक समय लगता था, साथ ही दस्तावेजों के आदान-प्रदान में भी देरी होने की संभावना बनी रहती थी। लेकिन अब राज्य में ही एजेंसी का थाना होने से चीजें और अधिक व्यवस्थित हो सकेंगी। इससे जांच में तेजी आएगी। साथ ही एजेंसी संवेदनशील मामलों में शुरुआती कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू कर पाएगी।

पश्चिम बंगाल में कई बड़े मामलों की जांच कर रही है NIA

एजेंसी पहले ही राज्य में कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है। इसमें बेलडांगा दंगा, मालदा के मोथाबाड़ी की घटना और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए विस्फोटों से जुड़े मामले शामिल हैं। कोलकाता में नए थाने से एजेंसी को इन मामलों में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा भविष्य में अगर केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल से जुड़े किसी भी मामले की जांच एनआईए को सौंपती है, तो इसकी FIR कोलकाता में ही दर्ज की जा सकेगी। हालांकि, किसी भी मामले की जांच एनआईए को सौंपने का फैसला सिर्फ थाना खुलने से नहीं होता। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है।

सामान्य थाने से कितना अलग होगा NIA का थाना?

नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का विशेष थाना सामान्य पुलिस स्टेशन की तरह FIR दर्ज कर सकता है। एनआईए के विशेष थाने में अधिकारी, उपनिरीक्षक और अन्य कर्मचारी तैनात रहते हैं। हालांकि इनका काम सामान्य अपराधों की जांच करना नहीं होता है। यह थाना सिर्फ उन मामलों पर काम करेगा जिनकी जांच एनआईए कर रही है और जो एजेंसी के कानूनी अधिकार क्षेत्र में आते हैं। स्थानीय अपराधों से जुड़े मामलों की जांच पहले की तरह राज्य पुलिस ही करेगी।

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