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मोदी के बाद कौन बनेगा प्रधानमंत्री? 2029 से पहले होगा बड़ा खेल, योगी-शाह में किसकी राह मुश्किल करेंगे नबीन?

Amit Shah vs Yogi Adityanath: नितिन नबीन को जब से BJP का अध्यक्ष बनाया गया तब से हर कोई यह डिकोड करने में लगा हुआ है कि आखिर 10 करोड़ कार्यकर्ताओं वाली पार्टी में नितिन नबीन को ही क्यों कमान दी गई?

अभिषेक सिंह

BJP Internal Politics: नितिन नबीन को जब से भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया तब से हर कोई यह डिकोड करने में लगा हुआ है कि आखिर 10 करोड़ कार्यकर्ताओं वाली पार्टी में नितिन नबीन को ही क्यों कमान दी गई। आने वाले समय में असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं। लेकिन नितिन नबीन का इन तीनों ही राज्यों से ताल्लुक नहीं है।

इसके साथ ही नितिन नबीन कायस्थ परिवार से आते हैं। यानी वह सवर्ण कैटेगरी से हैं, जो कि पहले से ही बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है। ऐसे में अन्य कैटेगरीज को लुभाने वाला चेहरा चाहिए था पर ऐसा नहीं किया गया। लेकिन अब सियासी फिजाओं से उनके अध्यक्ष बनाने के पीछे का मकसद सुगबुगाहट बनकर बाहर आने लगा है।

2029 से पहले होगा बड़ा सियासी खेल!

वरिष्ठ राजनैतिक पत्रकार विश्व दीपक ने नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे की एक दिलचस्प कहानी बताई है। उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा कि असल में नबीन उस शतरंज का छोटा सा प्यादा हैं, जिसकी बिसात पर 2029 लोकसभा चुनाव के पहले बड़ा सियासी खेल खेला जाने वाला है।

मोदी के बाद कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

उन्होंने आगे लिखा कि उस खेल की गोटियां अभी से सेट की जा रही हैं। उन्होंने इस खेल का नाम 'मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम?' बताया है। जिसके पहले खिलाड़ी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे तो दूसरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। हो सकता है कि कोई डार्क हॉर्स बनकर भी आ जाए, लेकिन ऐसा शायद ही होगा।

मोदी के उत्तराधिकारी होंगे अमित शाह!

विश्व दीपक लिखते हैं कि पहले तो ऐसा नहीं लगता था पर इधर बीच अमित शाह की बॉडी लैंग्वेज, मीडिया-जनता के साथ उनका संवाद आदि देखकर पता चलता है कि वो अपने आप को मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर पेश कर रहे हैं। मोदी की विरासत पर मेरा दावा है- ऐसा अमित शाह की भाव भंगिमाओं से स्पष्ट होता है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। क्योंकि वो मोदी के सबसे भरोसेमंद और सबसे पुराने दोस्त, सहकर्मी हैं।

पीएम मोदी व नितिन नबीन (सोर्स- सोशल मीडिया)

हिंदुत्ववादी विरासत के दावेदार योगी!

दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं को भाजपा और संघ की हिंदुत्व वाली विरासत का असली दावेदार मानते हैं। इस मामले में उनको कोई चुनौती भी नहीं दे सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो बीजेपी का अगला अंत: संघर्ष मोदी की विरासत बनाम हिंदुत्व की सियासत के बीच होगा।

नितिन नबीन को क्यों बनाया अध्यक्ष?

विश्व दीपक ने आगे लिखा कि जनाधार हीन और 12वीं पास विधायक नितिन नबीन की भूमिका इस संघर्ष में हालांकि बहुत छोटी है, लेकिन मौका पड़ने पर अहम हो जाएगी। क्योंकि राजनीति में कई बार नगण्य होना अहम हो जाता है। नबीन जीरो थे इसी वजह से उन्हें हीरो बना दिया गया। उनके नाम का सहमति पिछले महीने अंडमान में हुई भागवत और शाह की मीटिंग के दौरान बनी।

एक और वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर लिखती हैं कि अमित शाह धर्मेन्द्र प्रधान या भूपेन्द्र यादव को चाहते थे। लेकिन RSS गुजराती लॉबी के बाहर का कोई आदमी चाहता था। अंत में जनाधार हीन और महज 12वीं पास विधायक नितिन नबीन का नाम तय कर दिया गया। हालांकि मेरा मानना है कि नबीन गजुराती लॉबी के ही हैं। वो वही करेंगे जो मोदी-शाह कहेंगे।

किसकी राह मुश्किल करेंगे नितिन नबीन?

खैर! नितिन नबीन के नाम पर संघ की भी मुहर लग चुकी है। ऐसे में 'मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम?' नामक खेल के दूसरे खिलाड़ी योगी आदित्यनाथ को अब अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। फिलहाल यह सियासी चर्चाएं हैं। आगे क्या कुछ होता है देखना काफी दिलचस्प होने वाला है।

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