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भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच ITBP प्रमुख ने शौर्य कमांडो की सराहना की।
अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना।
शौर्य कमांडो को कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
ITBP की हर सीमा सुरक्षा बटालियन में कमांडो टीम तैनात करने की योजना।
शौर्य कमांडो की अलग बटालियन बनाने की दिशा में काम जारी।
चीन का मुकाबला करने के लिए ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर जोर।
Who Are Indian Shaurya Commandos: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में तनाव जारी है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को बताया कि सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमना-सामना हो रहा है। इस बीच उन्होंने शौर्य कमांडो की भूमिका की सराहना की है। ये विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान कठिन परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने और सीमा पर चुनौतीपूर्ण हालात से निपटने के लिए तैयार किए गए हैं।
ITBP का गठन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद किया गया था। यह बल लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा में तैनात है। गलवान घाटी में 2020 की झड़प के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हुई हैं। ऐसे में ITBP ने शौर्य कमांडो जैसी विशेष इकाइयां तैयार की हैं। इन जवानों को ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में कठिन शारीरिक प्रशिक्षण और विशेष सामरिक अभ्यास से गुजरना पड़ता है।
ITBP प्रमुख के मुताबिक, शौर्य कमांडो की तैनाती का दायरा बढ़ाया जा रहा है। संवेदनशील सीमा पर तैनात प्रत्येक बटालियन में कम से कम एक शौर्य कमांडो टीम को शामिल किया गया है। इसके अलावा दो अतिरिक्त इकाइयां भी बनाई गई हैं। योजना के तहत भविष्य में प्रत्येक बटालियन की विशेष टुकड़ी को पूरी कंपनी के रूप में विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
ITBP का संचालन विभाग इन कमांडो को मिलाकर एक अलग बटालियन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। इनका उद्देश्य सीमा पर तनावपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से पहुंचना, विरोधी सैनिकों की गतिविधियों का जवाब देना और भारतीय चौकियों की स्थिति बनाए रखने में मदद करना है।
ITBP आधुनिक युद्ध में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दे रही है। कपूर ने कहा कि चीन ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है, इसलिए केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों से उसका मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP के 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन, ड्रोन रोधी प्रणालियों और विशेष प्रशिक्षण पर खर्च करने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, व्यापक आधुनिकीकरण योजना के तहत 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी बताया गया है।
बल की प्रत्येक सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून शामिल की गई है और जवानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ड्रोन से पहाड़ी घाटियों और दुर्गम इलाकों की निगरानी में मदद मिल सकती है, जबकि शौर्य कमांडो जमीन पर त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं। इस तरह तकनीक और विशेष प्रशिक्षण के मेल से भारत की सीमा सुरक्षा क्षमता मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।