क्या है 'मोंथा' का मतलब? फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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क्या है 'मोंथा' का मतलब? आखिर अरब सागर में उठे इस साइक्लोन का कैसे पड़ा ये नाम... यहां जानिए सबकुछ

Cyclone Montha: बंगाल की खाड़ी में बना भीषण चक्रवात ‘मोंथा’ मंगलवार रात आंध्र प्रदेश से टकरा गया जिसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। आइए जानते हैं इसका नाम कैसे पड़ा...

अमन उपाध्याय

Cyclone Montha News: बंगाल की खाड़ी में बना भीषण चक्रवात ‘मोंथा’ मंगलवार रात आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकरा गया। यह चक्रवात मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के पास लैंडफॉल करते हुए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंचा। इसके साथ मूसलाधार बारिश ने पूरे तटीय क्षेत्र को प्रभावित कर दिया।

तेज़ हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के तार टूट गए, पेड़ उखड़ गए और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। समुद्र में लगभग 10 फीट ऊंची लहरें उठीं, जिससे तटीय गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा में एक व्यक्ति की मौत की भी खबर मिल रही है।

कैसे पड़ा इस चक्रवात का नाम मोंथा?

उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों को वहां के सदस्य देशों की सूची से नाम दिए जाते हैं। 'मोंथा' नाम थाईलैंड ने सुझाया था। यह नाम थाई भाषा के शब्द ‘मोन्था’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है खुशबूदार या सुंदर फूल। इस क्षेत्र के 13 देश भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, यमन, ईरान, कतर, सऊदी अरब और यूएई मिलकर चक्रवातों के नाम तय करते हैं। हर देश 13 नामों की सूची देता है, जिससे कुल 169 नामों की लिस्ट बनती है। इन नामों की घोषणा भारत का क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC), नई दिल्ली करता है, जो विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) के तहत कार्य करता है।

कब और कहां टकराया चक्रवात?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि चक्रवात ‘मोंथा’ 28 अक्टूबर की रात आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास लैंडफॉल करेगा। अनुमान के मुताबिक, उस समय हवाओं की गति 90 से 120 किमी प्रति घंटे तक रह सकती है।

इस चेतावनी के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दीं। राज्य के 26 में से 23 जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। ओडिशा के गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भी भारी बारिश और तेज़ हवाओं की संभावना जताई गई है। वहीं, तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

असर और प्रशासनिक तैयारी

चक्रवात के असर से कई तटीय इलाकों में पेड़ों के गिरने, बिजली गिरने और जलभराव का खतरा बढ़ गया है। एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रबंधन बल की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे गैर-ज़रूरी यात्रा से बचें और स्थानीय निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

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