China Underwater Security Threat: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के कमांडेंट वाइस एडरल अनिल जग्गी ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि चीन अपने करीब 64 सक्रिय अनुसंधान और सर्वेक्षण जहाजों के बड़े बेड़े को नियमित रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात कर रहा है।
इन जहाजों के जरिए समुद्र तल, जलविज्ञान और समुद्रविज्ञान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया जा रहा है। पुणे में आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए वाइस एडमिरल जग्गी ने कहा कि ऐसी गतिविधियां केवल शांतिपूर्ण अनुसंधान तक सीमित नहीं हो सकतीं। उन्होंने बताया कि चीन सर्वेक्षण जहाजों के अलावा ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUV) और अंडरवाटर ग्लाइडर्स का भी इस्तेमाल कर रहा है।
इनमें से कुछ चीनी ग्लाइडर्स और AUV इंडोनेशिया तथा फिलीपींस में बरामद किए जा चुके हैं। उनके मुताबिक, समुद्र के भीतर से जुटाया गया डेटा चीनी नौसेना की पनडुब्बियों और परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वाइस एडमिरल जग्गी ने समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को भी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अंडरसी केबल, पाइपलाइन और अन्य समुद्री प्रतिष्ठान आधुनिक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान बाल्टिक सागर में अंडरसी केबलों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं ने इस खतरे को और स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत को अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि पानी के नीचे होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जा सके और महत्वपूर्ण समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
भारतीय नौसेना पहले ही UDA से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं और पहलों पर काम कर रही है। सेमिनार का आयोजन पुणे स्थित समुद्री अनुसंधान केंद्र (MRC) और नई दिल्ली स्थित भारतीय विश्व मामलों की परिषद (ICWA) ने किया था।
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने भी अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर रणनीतिक तैयारी की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास दूरसंचार केबल, तेल-गैस और हरित हाइड्रोजन पाइपलाइन, बिजली केबल और कई अपतटीय प्रतिष्ठान जैसे महत्वपूर्ण समुद्री संसाधन हैं।
उनके अनुसार, वैश्विक अंतरमहाद्वीपीय संचार का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर निर्भर है। भारत में 24 अंडरसी केबल हैं और इनका उपयोग पहले से ही काफी अधिक है। ऐसे में एक या दो केबल के क्षतिग्रस्त होने पर ट्रैफिक को दूसरी केबलों पर स्थानांतरित करना मुश्किल हो सकता है।
एडमिरल सिंह ने समुद्र तल पर युद्ध और सुरक्षा की रणनीति विकसित करने, अंडरसी केबलों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सिंगापुर की GUIDE पहल में भारत की जल्द में में भागीदारी की भी सिफारिश की।