एयर डिफेंस सिस्टम, फोटो - सोशल मीडिया 
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Explainer: आसान भाषा में समझिए एयर डिफेंस सिस्टम का ABC, भारतीय एयर डिफेंस से कांपता है पाकिस्तान?

तकनीक लगातार बदल रही है। हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्वार्म ड्रोन जैसी नई चुनौतियों के चलते भविष्य के एयर डिफेंस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लेजर हथियार को शामिल किया जा रहा है।

विकास कुमार उपाध्याय

नवभारत डिजिटल डेस्क : जब देश की सीमाओं पर तनाव जैसे माहौल हो, तब एक हमलावर मिसाइल या दुश्मन का लड़ाकू विमान सिर्फ कुछ मिनटों में ही कहर बरपा सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे हमलों से हमारे आसमान की सुरक्षा कैसे होती है? इसका जवाब है, एयर डिफेंस सिस्टम, मतलब वायु रक्षा प्रणाली। यह तकनीक किसी देश के लिए उतनी ही जरूरी है, जितनी एक योद्धा के लिए उसकी ढाल।

ऐसे में आज के इस एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि एयर डिफेंस सिस्टम होता क्या है और ये काम कैसे करता है। इसके साथ हम यह यह भी समझेंगे कि भारत और पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम कितना ताकतवर है? तो इसके लिए पढ़ते जाइए इस एक्सप्लेनर को अंत तक।

एयर डिफेंस सिस्टम क्या है?

एयर डिफेंस सिस्टम एक सैन्य तकनीकी ढांचा है, जो दुश्मन के विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई हमलों से देश की हवाई सीमा की रक्षा करता है। यह सिस्टम रडार, सेंसर, मिसाइल और गन जैसे हाईटेक हथियारों का नेटवर्क होता है जो आसमान में आने वाले हर खतरे पर पैनी नजर रखता है और समय रहते उसे हवा में ही खत्म कर देता है।

ऐसे करता है ये काम

एयर डिफेंस सिस्टम चार प्रमुख चरणों में काम करता है

  • खतरे की पहचान (Detection) - सबसे पहले रडार और सेंसर सक्रिय हो जाते हैं। जैसे ही कोई अनजान वस्तु हवाई क्षेत्र में प्रवेश करती है, ये उपकरण उसे पकड़ लेते हैं। लंबी, मध्यम और कम दूरी के रडार एक साथ मिलकर खतरे की गति, दिशा और ऊंचाई की जानकारी इकट्ठा करते हैं।
  • खतरे को ट्रैक करना (Tracking) - जैसे ही कोई खतरा पहचान में जाता है, उसे लगातार ट्रैक किया जाता है। चाहे वह मिसाइल हो, ड्रोन हो या फाइटर जेट, हर सेकंड की मूवमेंट रेकॉर्ड होती है। इसका मकसद यह जानना होता है कि वह किस दिशा में जा रहा है और किस चीज को निशाना बना सकता है।
  • निर्णय और जवाबी कार्रवाई (Command & Control) - इसके बाद कंट्रोल रूम में बैठे सैन्य अधिकारी तय करते हैं कि किस हथियार प्रणाली का इस्तेमाल कर उस खतरे को खत्म किया जाए। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह निर्णय सेकंडों में होता है, क्योंकि विलंब जानलेवा साबित हो सकता है।
  • खतरे को खत्म करना (Interception) - अब हथियार सिस्टम सक्रिय होता है। टारगेट को लॉक करके मिसाइल दागी जाती है, जो हवा में ही दुश्मन के हथियार को मार गिराती है।

भारत का एयर डिफेंस सिस्टम कितना ताकतवर है?

भारत का एयर डिफेंस सिस्टम बहुस्तरीय और विविधतापूर्ण है। इसमें रूसी, इजराइली और स्वदेशी तकनीकों का बेहतरीन मिश्रण शामिल है।

सबसे प्रमुख सिस्टम है S-400 ट्रायम्फ

यह दुनिया की सबसे खतरनाक और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली में से एक है। भारत ने इसे रूस से 5.43 अरब डॉलर में खरीदा है। यह सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के विमान, ड्रोन या मिसाइल को हवा में ही मार गिराने की क्षमता रखता है। इसे भारतीय सेना सुदर्शन चक्र कहती है।

इसके अलावा भारत के पास बराक-8 (इजराइली तकनीक), आकाश मिसाइल सिस्टम (स्वदेशी), स्पाइडर और इग्ला मिसाइल सिस्टम जैसे शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। इन सभी का मकसद आसमान से आने वाले खतरे को जमीन तक पहुंचने से पहले ही खत्म करना है।

पाकिस्तान और भारत के एयर डिफेंस में अंतर

जहां भारत ने एस-400 जैसी तकनीक हासिल कर ली है, वहीं पाकिस्तान का प्रमुख डिफेंस सिस्टम HQ-9 है, जो चीन से मिला है। इसकी मारक क्षमता 300 किमी तक मानी जाती है। पाकिस्तान ने फ्रांस से स्पाडा सिस्टम भी लिया है, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की रेंज, प्रतिक्रिया समय और विविधता कहीं अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। सेना की सुपरवुमन की वो कहानी जिसने SC को भी सोचने पर कर दिया था मजबूर, 5 साल पहले ही कोर्ट ने सोफिया कुरैशी का दिया था उदाहरण

भविष्य की वायु रक्षा कैसी होगी?

तकनीक लगातार बदल रही है। हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्वार्म ड्रोन जैसी नई चुनौतियों के चलते भविष्य के एयर डिफेंस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लेजर हथियार को शामिल किया जा रहा है। AI सिस्टम खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया को और तेज बनाने का काम करेगा, जबकि लेजर सिस्टम सस्ते और बेहद सटीक साबित होंगे।

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