सेना की सुपरवुमन की वो कहानी जिसने SC को भी सोचने पर कर दिया था मजबूर, 5 साल पहले ही कोर्ट ने सोफिया कुरैशी का दिया था उदाहरण

कर्नल सोफिया कुरैशी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की प्रतीक बन चुकी हैं। कोर्ट ने माना कि सेना में महिला अफसरों को सिर्फ स्टाफ असाइनमेंट तक सीमित करना अक्षम्य है।
सेना की सुपरवुमन की वो कहानी जिसने SC को भी सोचने पर कर दिया था मजबूर, 5 साल पहले ही कोर्ट ने सोफिया कुरैशी का दिया था उदाहरण
सेना की सुपरवुमन सोफिया कुरैशी, फोटो - सोशल मीडिया
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Operation Sindoor: जब भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंक के अड्डों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले किए, तो एक नाम फिर से सुर्खियों में आ गया, वह है कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम।

भारतीय सेना की यह जांबाज अधिकारी, जो कभी एक घरेलू चेहरा बन गई थीं, अब महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ऑपरेशन की ब्रीफिंग में उनका आत्मविश्वास आज भी देशवासियों की यादों में ताजा है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना उनकी ताकत

2020 में जब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया, तो कर्नल सोफिया कुरैशी को एक उदाहरण के रूप में कोट किया गया। कोर्ट ने माना कि सेना में महिला अफसरों को सिर्फ स्टाफ असाइनमेंट तक सीमित करना अक्षम्य है और यह संवैधानिक मूल्यों का अपमान भी है।

महिला नेतृत्व का प्रतीक

कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं जिन्होंने 'एक्सरसाइज फोर्स 18' जैसे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारत की टुकड़ी का नेतृत्व किया। यह अब तक का सबसे बड़ा विदेशी अभ्यास था जिसे भारत ने आयोजित किया था। इस उपलब्धि ने न केवल सेना में महिला नेतृत्व की संभावनाएं खोलीं, बल्कि यह भी साबित किया कि महिलाएं हर मोर्चे पर सक्षम हैं।

अंतरराष्ट्रीय मिशनों में भी निभाई अहम भूमिका

कर्नल कुरैशी का करियर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2006 में संयुक्त राष्ट्र के कांगो शांति मिशन में भाग लिया, जहां उन्होंने युद्धविराम की निगरानी और मानवीय सहायता की जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ राहत कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।

शिक्षा और निजी जीवन

गुजरात के वडोदरा में जन्मीं कर्नल सोफिया कुरैशी ने 1997 में मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री प्राप्त की। सेना के सबसे महत्वपूर्ण कोर में से एक, सिग्नल कोर में अधिकारी बनना और वहां से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक भारत का प्रतिनिधित्व करना, उनका सफर प्रेरणादायक है।

2016 में उन्होंने वो कर दिखाया जो अब तक किसी भारतीय महिला ने नहीं किया था। उन्होंने साल 2016 में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में टुकड़ी का नेतृत्व किया। यह न केवल एक ऐतिहासिक क्षण था, बल्कि उन लाखों लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण भी, जो सेना में जाकर देश सेवा का सपना देखती हैं।

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