असदुद्दीन ओवैसी, फोटो- सोशल मीडिया 
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टीपू सुल्तान विवाद में कूदे ओवैसी, पढ़ने लगे कसीदे; बोले- 'जिसकी अंगूठी पर राम लिखा था, वह नफरत का पात्र नहीं'

Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान और शिवाजी महाराज की तुलना पर सियासी संग्राम छिड़ गया। ओवैसी ने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों से लड़ने वाला शहीद और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बताया है।

प्रतीक पाण्डेय

Asaduddin Owaisi Statement on Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान को लेकर एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद भाजपा आक्रामक है। अब इस विवाद में असदुद्दीन ओवैसी ने टीपू के पक्ष में ऐतिहासिक दलीलें पेश कर नया मोर्चा खोल दिया है।

महाराष्ट्र में विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। इस टिप्पणी को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने "शर्मनाक" और "निंदनीय" करार दिया। फडणवीस ने नागपुर में कहा कि महाराष्ट्र इस तरह की तुलना को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा और कांग्रेस नेता को इसके लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने महाविकास अघाड़ी के अन्य सहयोगियों से भी इस पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।

ओवैसी की एंट्री: 'राम' नाम वाली अंगूठी का दिया हवाला

इस विवाद में कूदते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और देवेंद्र फडणवीस पर तीखा प्रहार किया है। ओवैसी ने टीपू सुल्तान को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए एक ऐतिहासिक तथ्य पेश किया। उन्होंने पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि टीपू सुल्तान के पास से जो अंगूठी मिली थी, उस पर 'राम' लिखा हुआ था? ओवैसी के अनुसार, साल 2014 में बर्सानिया में इस अंगूठी की नीलामी भी हुई थी। उन्होंने भाजपा पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर नफरत फैलाने का आरोप लगाया।

शहादत बनाम 'लव लेटर': सावरकर पर साधा निशाना

असदुद्दीन ओवैसी ने टीपू सुल्तान की वीरता का बखान करते हुए 1799 में अंग्रेजों के खिलाफ उनके युद्ध और शहादत का जिक्र किया। उन्होंने वीर सावरकर का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि टीपू ने जेल में बैठकर अंग्रेजों को 'लव लेटर' (दया याचिका) नहीं लिखे, बल्कि वे अपने मुल्क को आजाद कराने के लिए शहीद हो गए। ओवैसी ने दावा किया कि अंग्रेजों में टीपू का इतना खौफ था कि उनकी मौत के बाद भी डेढ़ घंटे तक फौज उनकी लाश के पास जाने से डरती रही।

गांधी, कलाम और संविधान का साक्ष्य

अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए ओवैसी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और महात्मा गांधी के संदर्भों का उपयोग किया। उन्होंने कहा कि कलाम ने अपनी किताब 'विंग्स ऑफ फायर' में टीपू सुल्तान को रॉकेट टेक्नोलॉजी का जनक माना है। साथ ही, उन्होंने महात्मा गांधी की मैगजीन 'यंग एज' (यंग इंडिया) का हवाला देते हुए कहा कि गांधी ने भी टीपू को हिंदू-मुस्लिम एकता का समर्थक बताया था।

ओवैसी ने आगे जानकारी दी कि टीपू सुल्तान ने श्रृंगेरी मठ का निर्माण तब करवाया था जब फौज ने वहां से सोने की मूर्ति उठा ली थी। उन्होंने प्रशासन में हिंदुओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि टीपू की फौज के कमांडर अप्पाजी राम थे और उनके सलाहकार कृष्णा राव थे। ओवैसी ने अंत में यह भी याद दिलाया कि भारत के पहले संविधान की किताब में भी टीपू सुल्तान की तस्वीर मौजूद है।

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