BJP Slams Opposition After SC Judgment: विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में दाखिल सभी याचिकों को खाजिर करते हुए चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है। कोर्ट ने माना कि, मतदाता सूची में नाम जोड़ना या घटना को लेकर चुनाव आयोग मिली शक्तियां संवैधानिक रूप से सही हैं।
कोर्ट के फैसले आने के बाद भाजपा विपक्ष पर हमलावर हो गई। तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जो समय-समय पर आयोजित की जाती है। उन्होंने इसे लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने आईएएनएस से कहा, एसआईआर एक नियमित रूप से संचालित होने वाली चुनावी प्रक्रिया है। यह किसी सरकार या भाजपा द्वारा शुरू की गई नीति नहीं है, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाने वाली एक प्रक्रिया है।
संभवतः यह देश में 10वीं या 11वीं बार है, जब एसआईआर का संचालन किया जा रहा है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन की पार्टियां चुनाव हार रही हैं, इसलिए वे अब अपनी हार के लिए एसआईआर प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही हैं।
वहीं, वरिष्ठ भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कोर्ट के फैसले पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि देखिए एसआईआर कोई भारत में पीएम मोदी ने नई-नवेली योजना तो बनाई नहीं है। यह एक लगातार, निरंतरता के साथ चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें जो वैध मतदाता हो, वैध नागरिक हो, उनकी सुरक्षा है।
तेलंगाना जन समिति प्रमुख एम. कोडंडाराम ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, एम. कोडंडाराम ने कहा, एसआईआर के कारण नागरिकों, विशेषकर अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और निर्धन वर्ग जैसे वंचित समुदायों के मताधिकार का हनन हो रहा है। इस कारण वे अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं।
मतदान वह संवैधानिक हथियार है, जिसके बल पर ये वर्ग सरकार से अपनी मांगें मनवाते हैं। यदि उनसे यह अधिकार छिन गया, तो वे नागरिक अधिकारों से विहीन हो जाएंगे और फिर सरकार के समक्ष अपनी बात रखने की उनकी शक्ति पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में कराए गए एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के समूह ने याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची का संशोधन की प्रक्रिया एनआरसी जैसी थी, चुनाव आयोग इसके जरिए लोगों की नागरिकता का सत्यापन कर रहा था।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। 29 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी। इसी पर आज कोर्ट ने फैसला सुनाया है।