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UGC जातिगत भेदभाव नियम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और UGC से मांगा जवाब; 4 हफ्ते बाद सुनवाई

Supreme Court UGC Equality Rules: UGC के जातिगत भेदभाव रोकने वाले नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC से जवाब मांगा। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

करुणा नंद शाहवाल

Supreme Court On UGC Rules 2026: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है।

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि केंद्र और यूजीसी अपना जवाब दाखिल करें तथा उसकी प्रति सभी याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। याचिका में यूजीसी के 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम, 2026’ के खंड 3(सी) को चुनौती दी गई है।

पहले भी विवादित प्रावधान पर रोक लगा चुका है SC

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यूजीसी के विवादित प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा चुका है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें केंद्र सरकार और यूजीसी की ओर से दाखिल जवाब की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे वे अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सके।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित नियम के विवादित प्रावधान पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया था और मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

UGC के 2026 नियम को क्यों दी गई चुनौती?

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम, 2026’ अधिसूचित किए थे। इन्हीं नियमों के एक विवादित प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियम का खंड 3(सी) मनमाना और भेदभावपूर्ण है।

उनका कहना है कि यह प्रावधान कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने का आधार बन सकता है। याचिका में दलील दी गई है कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

UGC नियम पर कानूनी बहस तेज

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी है कि यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के खिलाफ है। उनके अनुसार, इससे उच्च शिक्षा में सभी छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच सकता है।

गौरतलब है कि यूजीसी ने यह नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित किया था। हालांकि, इसके कुछ प्रावधानों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में कानूनी बहस शुरू हो गई है। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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