सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-हसन की वैधता पर सख्त (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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तलाक-ए-हसन खत्म होने की कगार पर! इस्लामी प्रथा पर जस्टिस सूर्यकांत के 5 सवाल जिन पर सभी रह गये खामोश

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-हसन की वैधता पर सख्त रुख में है और संकेत दे चुका है कि यह प्रथा जल्द ही खत्म हो सकती है।

प्रिया सिंह

Supreme Court On Talaq-e-Hasan: सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर मुस्लिम तलाक प्रथाओं की जांच कर रहा है। 26 नवंबर को होने वाली सुनवाई में तलाक-ए-हसन जैसी विवादित प्रथा पर बड़ा फैसला आ सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने इस प्रथा को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया और कड़े सवाल उठाए। इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब न मिलने से माना जा रहा है कि यह कुप्रथा खत्म हो सकती है।

तलाक-ए-हसन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन प्रथा को लेकर सख्त टिप्पणी की है, जिसमें एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को लगातार तीन महीनों तक हर महीने एक बार ‘तलाक’ कहकर तलाक दे सकता है। बुधवार को कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि यह प्रथा खत्म हो सकती है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है और कोर्ट को इसमें दखल देना पड़ सकता है।

कोर्ट ने क्यों कहा- दखल जरूरी

खबरों के मुताबिक, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई प्रथा महिलाओं के अधिकारों और गरिमा पर चोट करती है, तो सुप्रीम कोर्ट को सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। उनका कहना था कि एक सभ्य समाज में ऐसी परंपराओं या भेदभावपूर्ण तरीकों को जारी नहीं रखा जा सकता।

जस्टिस सूर्यकांत के 5 महत्वपूर्ण सवाल

  1. क्या महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली प्रथा जारी रहनी चाहिए?
  2. हम 2025 में कैसे ऐसी सोच को बढ़ावा दे सकते हैं?
  3. क्या धार्मिक प्रथाएं इसी तरह लागू होनी चाहिए?
  4. क्या इससे महिलाओं की इज्जत सुरक्षित रह सकती है?
  5. क्या सभ्य समाज में ऐसी कुप्रथाओं की इजाजत दी जा सकती है?

इन सवालों के जवाब न मिल पाने के कारण माना जा रहा है कि तलाक-ए-हसन भी तीन तलाक की तरह खत्म हो सकता है।

याचिका किसने दायर की थी?

यह मामला पत्रकार बेनजीर हिना की 2022 की PIL पर आधारित है। उन्होंने दलील दी कि यह प्रथा अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करती है। उन्होंने बताया कि उनके पति ने एक वकील के माध्यम से तलाक-ए-हसन नोटिस भेजकर तलाक दे दिया, जबकि उनसे दहेज मांगने की शिकायत भी थी।

वकील के जरिए तलाक मान्य नहीं, सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि किसी वकील द्वारा भेजा गया तलाक नोटिस वैध नहीं माना जाएगा, क्योंकि उस पर पति के हस्ताक्षर नहीं होते। याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, अवैध तलाक से महिला बहुपत्नी जैसे हालात में फंस सकती है, खासकर जब पति पहले से दूसरी शादी कर चुका हो।

क्या है तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-तफवीज?

तलाक-ए-हसन: तीन महीनों में हर महीने एक बार तलाक कहने की प्रक्रिया। तलाक-ए-तफवीज: इसमें पति अपनी पत्नी को खुद तलाक देने का अधिकार सौंप सकता है। इससे पत्नी बिना कोर्ट जाए संगत परिस्थितियों में शादी खत्म कर सकती है।

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