Sirhind Fateh Diwas 2026: बाबा बंदा सिंह बहादुर के सरहिंद फतेह दिवस के पावन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को शुभकामनाएं दीं है। उन्होंने बाबा बंदा सिंह बहादुर को मन से वैरागी और धर्मरक्षा के लिए अदम्य योद्धा बताया। बंदा सिंह बहादुर मुगल काल में एक महान सिख योद्धा थे। उन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए पहले स्वतंत्र सिख साम्राज्य की नींव रखी। बंदा सिंह बहादुर, गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों से प्रेरित थे। उन्होंने मुगल काल में सरहिंद के तत्कालीन गवर्नर वजीर खान को हराकर साहिबजादों की शहादत का बदला लिया था।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, धर्म के प्रति अटूट निष्ठा, मातृभूमि के प्रति पूर्ण समर्पण और अन्याय के विरुद्ध अद्भुत साहस की प्रतिमूर्ति बाबा बंदा सिंह बहादुर के सरहिंद फतह दिवस की शुभकामनाएं। बाबा बंदा सिंह बहादुर मन से वैरागी और धर्मरक्षा के लिए अदम्य योद्धा थे।
उन्होंने किसानों को संगठित कर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और मुगलों को पराजित कर स्वाभिमान, साहस एवं धर्मरक्षा का अमर संदेश दिया। असंख्य अत्याचार सहने के बावजूद उन्होंने धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया। उनका जीवन सदैव राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए प्रेरणाशक्ति बना रहेगा।
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में खालसा द्वारा सरहिंद की विजय और वजीर खान का अंत, केवल एक राजनीतिक जीत नहीं थी। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कलगीधर पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने शोषितों को अमृत का उपहार प्रदान किया, जिससे वे उस समय के सबसे शक्तिशाली और अत्याचारी शासन का सामना करने में सक्षम हो सके।
आगे उन्होंने लिखा, चप्पड़ चिड़ी की पावन धरती पर स्थित फतेह बुर्ज, बाबा बंदा सिंह बहादुर और सभी शहीद सिंहों के शौर्य का साक्षी है, जिन्होंने कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेश का पालन करते हुए अपने अदम्य साहस से न्याय का परचम लहराया। सरहिंद फतेह दिवस के पावन अवसर पर हम बाबा बंदा सिंह बहादुर और सभी शहीद सिंहों के शौर्य को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 'सरहिंद फतेह दिवस' पर समस्त संगत को बधाई।
इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट में लिखा, सरहिंद की विजय केवल किसी शहर या भौगोलिक क्षेत्र की जीत नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य की, अत्याचार पर न्याय की और दमन पर अधिकार की विजय है। सरहिंद विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि जब अत्याचार अपनी सीमाएं लांघ जाता है, तो सत्य और धर्म की शक्ति उसका अंत कर देती है।
छोटे साहिबजादों की हृदयविदारक शहादत के बाद खालसा पंथ के भीतर जो रोष जागा था, उसी ने सरहिंद विजय की गाथा लिखी। सरहिंद विजय दिवस के अवसर पर, सरहिंद को जीतने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर के शौर्य को और सभी शहीद सिंहों को हमारी ओर से हार्दिक नमन। सरहिंद विजय दिवस पर समस्त संगत को लख-लख बधाइयां।
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बाबा बंदा सिंह बहादुर ने वर्ष 1710 में आज के दिन सरहिंद पर विजय प्राप्त की थी। उसी याद में सरहिंद फतेह दिवस मनाया जाता है। यह विजय साहिबजादों की शहादत का बदला था। चप्पड़चिड़ी के मैदान में गवर्नर वजीर खान को हराकर बाबा बंदा सिंह ने आज ही के दिन सिख साम्राज्य की नींव रखी थी।