मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फोटो: @mieknathshinde) 
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मराठा समुदाय को 'रिकार्ड समय' में आरक्षण प्रदान किया: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार ने मराठा आरक्षण का वादा "रिकॉर्ड समय" में पूरा किया, वहीं विपक्षी गठबंधन ने समुदाय का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया और उसे आरक्षण से वंचित किया।

शुभम सोनडवले

ठाणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने राज्य में महा विकास आघाडी (एमवीए) पर मंगलवार को यह कहते हुए निशाना साधा कि जहां एक ओर उनकी सरकार ने मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) का वादा "रिकॉर्ड समय" में पूरा किया, वहीं विपक्षी गठबंधन ने समुदाय का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया और उसे आरक्षण से वंचित किया।

शिंदे ने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) -राकांपा (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) गठबंधन ने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए और उनकी सरकार द्वारा लिए गए फैसले में खामियां निकालने के लिए एमवीए की आलोचना की। एमवीए में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (यूबीटी) शामिल हैं।

शिंदे ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, "उन्होंने मराठा समुदाय का इस्तेमाल केवल अपने फायदे के लिए किया और उन्हें आरक्षण से वंचित रखा, लेकिन हमारी सरकार ने वह प्रदान किया। मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर वादा किया था कि हमारी सरकार मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देगी।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने विशेष बैठकें आहूत कीं, पिछड़ा आयोग का पुनर्गठन किया और एक व्यापक सर्वेक्षण किया, जिससे साबित हुआ कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। शिंदे ने विपक्षी एमवीए पर निशाना साधते हुए कहा, "हमने इसे रिकॉर्ड समय में किया। जिन लोगों को यह करना था, उन्होंने वर्षों तक कुछ नहीं किया, लेकिन अब जब हमने आरक्षण दे दिया है, तो वे दावा कर रहे हैं कि यह टिकेगा नहीं।" उन्होंने कहा कि विपक्ष को मराठा समुदाय को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का समर्थन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, "मराठा समुदाय को इससे लाभ होना चाहिए। यदि आपको लगता है कि यह नहीं टिकेगा, तो हमें कारण बताएं। फिर मैं आपको बताऊंगा कि यह क्यों बरकरार रहेगा। कई लोग अदालत गए, लेकिन किसी भी अदालत ने कोई रोक नहीं लगाई और आज मराठा आरक्षण लागू है।"

मनोज जरांगे पाटिल के उग्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में, महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला एक विधेयक 20 फरवरी को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। (एजेंसी)

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