राघव चड्ढा, पीएम मोदी और अरविंद केजरीवाल 
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AAP का 'चमकता सितारा' अब थामेगा कमल? राघव चड्ढा और बीजेपी के बीच पक रही खिचड़ी की इनसाइड स्टोरी!

Raghav Chadha: क्या राघव चड्ढा थामेंगे BJP का हाथ? राज्यसभा में उपनेता पद से हटने के बाद AAP में बढ़ी रार। वीरेंद्र सचदेवा के बयान और अशोक मित्तल की नियुक्ति ने बढ़ाई हलचल। जानें पूरी सच्चाई।

अर्पित शुक्ला

Raghav Chadha Controversy: राजनीति की बिसात पर कब कौन सा मोहरा अपनी चाल बदल दे, इसे भविष्यवाणी करना मुश्किल है। लेकिन इस समय दिल्ली से लेकर पंजाब तक सियासत में एक सवाल गूंज रहा है, क्या राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थामने जा रहे हैं? हाल ही में राघव को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने और पार्टी के भीतर उन्हें किनारे किए जाने की घटनाओं ने इन अफवाहों को और हवा दी है। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा खुलकर होने लगी है कि राघव और बीजेपी के बीच खिचड़ी पक रही है।

बीजेपी की चुटकी और राघव की 'खामोशी'

काफी समय से यह चर्चा रही है कि राघव चड्ढा (Raghav Chadha) बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम इस दिशा में इशारा कर रहे हैं। इस बीच, दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने चुटकी लेते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल को अब 'नैतिक जिम्मेदारी' दिखानी चाहिए और राघव चड्ढा को तुरंत पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए। सचदेवा का यह बयान उस वक्त आया जब राघव ने खुद को 'खामोश सिपाही' के रूप में पेश किया। बीजेपी की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि वे इस अंदरूनी कलह का फायदा उठाने के लिए तैयार बैठे हैं।

Raghav Chadha की जगह डिप्टी लीडर बने अशोक मित्तल

जब राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई, तो मीडिया ने उनसे राघव के बीजेपी कनेक्शन पर सवाल किया। मित्तल ने बड़े सधे हुए तरीके से जवाब दिया कि उन्हें इस बारे में "कोई जानकारी नहीं है।" उनका यह बयान सवाल खड़ा करता है कि क्या पार्टी के भीतर इतनी बड़ी हलचल से शीर्ष नेता अनजान हैं, या फिर यह 'वेट एंड वॉच' की रणनीति का हिस्सा है? मित्तल ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया, लेकिन राघव चड्ढा की सोशल मीडिया पोस्ट और उनके बागी तेवर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

दोहराया जाएगा स्वाति मालीवाल वाला कांड?

राघव चड्ढा (Raghav Chadha) अब अपनी चुप्पी को अपनी हार न मानने की बात कह रहे हैं, जो सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व को चुनौती देना है। इससे पहले स्वाति मालीवाल के मामले में भी पार्टी ने इसी तरह का कड़ा रुख अपनाया था। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा अब उस मोड़ पर खड़े हैं जहां से उनका पार्टी में वापसी करना मुश्किल हो सकता है। अगर वे बीजेपी में जाते हैं, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि राघव न केवल पंजाब जीत के मुख्य शिल्पकार रहे हैं, बल्कि वे दिल्ली और पंजाब के बीच एक मजबूत कड़ी भी थे।

क्या राघव चड्ढा इस्तीफा देंगे?

राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। अगर वे पार्टी छोड़ते हैं या बीजेपी में शामिल होते हैं, तो उन्हें अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ सकता है। लेकिन जिस तरह से बीजेपी उन्हें समर्थन देती दिख रही है और 'आप' नेता उन पर हमले कर रहे हैं, उससे लगता है कि भविष्य में कोई बड़ा धमाका होने वाला है।

क्या राघव चड्ढा अपनी सदस्यता की कुर्बानी देकर बीजेपी में शामिल होंगे या फिर वे पार्टी के भीतर रहकर ही 'विद्रोही' की भूमिका निभाते रहेंगे? वीरेंद्र सचदेवा का उन्हें पार्टी से निकालने का सुझाव और राघव की खुद की आक्रामक ब्रांडिंग यह संकेत दे रही है कि आम आदमी पार्टी का यह चमकता सितारा अब अपनी नई मंजिल तलाश चुका है।

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