Narendra Modi 25 Years Political Journey: जैसा कि देश का हर नागरिक जानता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। 2026 में आज उनका 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर उनकी यात्रा को केवल प्रधानमंत्री बनने तक सीमित रखने के बजाय वडनगर के शुरुआती जीवन से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के पड़ावों के रूप में देखा जा सकता है।
इस दौरान सबसे खास बात यह है कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। अक्टूबर 2025 में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुके थे। 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। ऐसा लगता है कि जनता उनके कुशल नेतृत्व की कायल है और उनको बार-बार देश सेवा के लिए मौका देने का मूड बना रही है।
आइए जानते हैं 76वें जन्मदिन के मौके पर वडनगर से वाराणसी तक का पूरा सफरनामा, जिसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भी हम सबके प्रिय राजनेता बने हुए हैं।
नरेंद्र मोदी का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ। प्रधानमंत्री की आधिकारिक जीवनी के अनुसार उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था और वे दामोदरदास मोदी तथा हीराबा मोदी की संतान हैं। वडनगर उस समय एक छोटा कस्बा था और मोदी ने अपने शुरुआती वर्ष वहीं बिताए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अलग-अलग सार्वजनिक बातचीत में वडनगर के अपने बचपन को याद किया है। उन्होंने बताया है कि उस समय कस्बे की आबादी करीब 15 हजार के आसपास थी और शिक्षा को लेकर वहां विशेष माहौल था। वडनगर का इतिहास भी काफी पुराना है। प्रधानमंत्री ने इसे बौद्ध शिक्षा और परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान के रूप में रेखांकित किया है।
वडनगर का यह शुरुआती जीवन उनकी सार्वजनिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। बाद के वर्षों में जब वे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंचे तो वडनगर उनके राजनीतिक जीवन की पहचान से लगातार जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे कई मौकों पर अपने जन्मस्थान और वहां बिताए बचपन का उल्लेख करते रहे हैं। इस तरह 2026 में उनके जन्मदिन की कहानी का पहला अध्याय उसी वडनगर से शुरू होता है, जहां से उनका जीवन सफर शुरू हुआ था।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा सीधे किसी निर्वाचित पद से शुरू नहीं हुई। उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर काम करते हुए राजनीति में अपनी भूमिका बनाई। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी को देखने से पता चलता है कि वे लंबे समय तक संगठन और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता रहे हैं। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते हुए वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बड़ी पहचान बनायी।
नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि संगठन में काम करने के बाद उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी मिली। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली। यह वह मोड़ था, जब संगठनात्मक राजनीति से उनका प्रशासनिक नेतृत्व का दौर शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में अपने इस पड़ाव को याद करते हुए कहा था कि उस समय गुजरात कई चुनौतियों से गुजर रहा था, जिनमें 2001 का भूकंप, पहले के चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता शामिल थीं। इस तरह से देखा जाए तो 2001 का साल उनकी सार्वजनिक यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण रहा। यही वह समय था जब उन्हें पहली बार किसी सरकार के प्रमुख के रूप में काम करने की जिम्मेदारी मिली।
नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनका करीब 13 वर्ष का कार्यकाल था और वे राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं।
उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की शुरुआत 2001 के कच्छ भूकंप के बाद के दौर में हुई। इसके बाद गुजरात में प्रशासन, बुनियादी ढांचे, निवेश, बिजली, सड़क, पानी और कृषि जैसे क्षेत्रों को लेकर कई सरकारी कार्यक्रम चलाए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि गुजरात में कृषि जैसे क्षेत्रों में भी बदलाव पर काम हुआ।
गुजरात का यह दौर उनके राजनीतिक जीवन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यहीं उन्होंने राज्य स्तर पर प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया। लगभग 13 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बाद 2014 में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। इस समय तक उनकी पहचान गुजरात की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व के रूप में स्थापित हो चुकी थी।
26 मई 2014 नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी तारीखों में से एक रही। इसी दिन उन्होंने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री कार्यालय की जीवनी के अनुसार 2014 में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 में वे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज जानकारी के अनुसार 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद फिर से 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
2014 के बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जनधन, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, डिजिटल भुगतान और DBT जैसी योजनाओं का विस्तार हुआ। इन कार्यक्रमों का लाभार्थी आधार अलग-अलग वर्गों से जुड़ा है। इसलिए मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल को समझने के लिए केवल चुनावी आंकड़ों के बजाय सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और उनके प्रभाव से जुड़े आंकड़ों को भी देखा जाता है।
नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में वाराणसी अर्थात् काशी का भी विशेष स्थान है। उन्होंने 2014 में वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर संसद की राजनीति में अपना वर्चस्व कायम किया। इसके बाद 2019 तथा 2024 में भी इसी सीट से चुनाव जीता। इस तरह वाराणसी से वह लगातार 3 बार सांसद चुने गए हैं।
प्रधानमंत्री ने स्वयं कई अवसरों पर वाराणसी को अपनी राजनीतिक और आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ा है। 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वडनगर और वाराणसी के बीच बौद्ध परंपरा से जुड़ा संबंध भी रेखांकित किया। उनके अनुसार वडनगर ऐतिहासिक रूप से बौद्ध शिक्षा का केंद्र रहा है, जबकि वाराणसी संसदीय क्षेत्र में स्थित सारनाथ भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ा स्थान है।
वाराणसी में प्रधानमंत्री के सांसद के रूप में विकास कार्यों से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी समय-समय पर सामने आए हैं। शहर में सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, पर्यटन, धार्मिक स्थलों और कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों पर केंद्र और राज्य सरकारों ने काम किया है। यही वजह है कि जन्मदिन पर एक बार फिर वडनगर से वाराणसी का कनेक्शन जोड़ा जा रहा है।
2024 में लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। तीसरे कार्यकाल में सरकार का प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2025 में सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश करते हुए कहा था कि संविधान के मूल्यों को मार्गदर्शक रखते हुए विकसित भारत के सामूहिक लक्ष्य के लिए आगे काम करना उनकी प्रतिबद्धता है।
2026 तक उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में 2014 के बाद शुरू या विस्तारित कई योजनाएं करोड़ों लोगों तक पहुंच चुकी हैं। इनमें PM-KISAN के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर, आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा, उज्ज्वला के जरिए LPG कनेक्शन और जल जीवन मिशन के जरिए ग्रामीण नल कनेक्शन शामिल हैं। इस चरण को उनकी यात्रा में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि 2014 में शुरू हुई राष्ट्रीय जिम्मेदारी अब तीसरे कार्यकाल तक पहुंच चुकी है।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक व सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में यात्रा 7 अक्टूबर 2001 से शुरू होकर 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इसमें लगभग 13 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल शामिल है। इस पूरे सफर में एक तरफ वडनगर का शुरुआती जीवन है, दूसरी तरफ गुजरात का प्रशासनिक अनुभव और फिर वाराणसी के जरिए राष्ट्रीय संसद की राजनीति। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री के रूप में उनके तीन कार्यकाल इस यात्रा के बड़े राजनीतिक पड़ाव हैं।
इस तरह कहा जा सकता है कि आज नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन के विभिन्न उपलब्धियों को रेखांकित करने और लोगों को याद दिलाने का दिन है, ताकि अन्य राजनेताओं को भी मोदी के जीवन से प्रेरणा मिले।