पेट्रोल-डीज़ल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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Petrol Diesel Price: क्या और महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? कच्चे तेल के खेल पर मंत्री सुरेश गोपी का बड़ा बयान

Petrol Diesel Price Hike: ग्लोबल मार्केट में मचे घमासान के बीच क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान पर केंद्रीय मंत्रियों ने दिया अपडेट।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Suresh Gopi Petroleum Minister Statement On Petrol Diesel Price: आने वाले दिनों में आपकी जेब पर पेट्रोल और डीजल का बोझ कितना बढ़ेगा, यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने साफ कर दिया है कि ईंधन के दामों में कोई भी बदलाव आने वाले समय में कच्चे तेल की चाल को देखकर ही तय होगा। सरकार फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार की हर हलचल पर कड़ी नजर रख रही है।

युद्ध के चलते बढ़ रहे हैं दाम

केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध और तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसी वजह से देश में मई के महीने में ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी देखी जा चुकी है। अगर दिल्ली की बात करें, तो राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल और डीजल अप्रैल के मुकाबले औसत 7.50 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं, जिससे आम जनता का बजट बिगड़ रहा है।

ग्लोबल मार्केट की चुनौतियों पर नजर

केरल के त्रिशूर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुरेश गोपी ने कहा कि तेल की सप्लाई और दुनिया के हालातों को देखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा। दूसरी ओर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी लुधियाना में कहा कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्ध ने पूरे पेट्रोलियम सेक्टर के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया कि सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि जनता पर इसका सीधा असर न पड़े।

तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

अधिकारियों के मुताबिक, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही आम ग्राहकों पर डाला गया है। इसका नतीजा यह है कि हमारी सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—इस समय भारी घाटा उठा रही हैं। लागत और बिक्री के बीच के इस अंतर के कारण इन कंपनियों को हर दिन करीब 600 करोड़ रुपये से लेकर 750 करोड़ रुपये तक का नुकसान (Under Recovery) झेलना पड़ रहा है।

बाजार में क्या हैं कच्चे तेल के भाव?

अगर मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर डालें तो वहां हालात अब भी काफी संवेदनशील बने हुए हैं। इस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।

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