P Chidambaram Controversy: पी. चिदंबरम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे अनुभवी, बौद्धिक और वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते रहे हैं। वे वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं और पार्टी के रणनीतिक व नीतिगत मामलों में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार में यूपीए के दौरान देश के वित्त मंत्री और गृह मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके पी. चिदंबरम कई बार पार्टी के लिए संकटमोचन तो कई बार किरकिरी का कारण भी बने हैं।
मई 2004 से नवंबर 2008 तक वित्त मंत्री के रुप में बड़ी जिम्मेदारी संभाली। फिर मुंबई आतंकी हमले के बाद उन्हें देश का गृह मंत्री बनाया गया था। साढ़े तीन साल गृह मंत्रालय संभालने के बाद मनमोहन सिंह सरकार में वे दोबारा वित्त मंत्री बनाए गए, क्योंकि वे मनमोहन सिंह के काफी करीब माने जाते थे।
देश की आर्थिक नीतियों और वित्तीय मामलों पर पी. चिदंबरम की पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। वे अब तक देश का आम बजट 7 बार संसद में पेश कर चुके हैं, जिनमें से 5 बजट उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में वित्त मंत्री के रूप में प्रस्तुत किए।
आर्थिक विशेषज्ञता के अलावा, एक वरिष्ठ वकील होने के नाते वे आर्थिक, कानूनी और संवैधानिक मामलों में भी पार्टी के लिए मजबूत तर्क और रणनीति तैयार करते हैं। संसद का सदन हो या मीडिया का मंच, वे पार्टी के रुख को बेबाकी से रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।
पी. चिदंबरम वित्त समिति के साथ-साथ वित्त मंत्रालय सलाहकार समिति के सदस्य हैं। इसके अलावा भारत-इटली संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष की जिम्मेदारी फरवरी 2026 से संभाल रहे हैं।
चिदंबरम अपनी स्वतंत्र सोच और बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कई बार उनके व्यक्तिगत विचार पार्टी लाइन से अलग दिखते हैं। इसके कारण कांग्रेस को राजनीतिक रूप से डैमेज कंट्रोल भी करना पड़ता है। हाल ही में BRICS सम्मेलनों के औचित्य पर सवाल उठाने वाले उनके बयान पर काफी विवाद खड़ा हो गया था।
उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ ब्रिक्स सम्मेलनों से भारत को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं दिखा, जिसके बाद बीजेपी ने उन पर तीखे हमले बोले। हालांकि बाद में कांग्रेस ने आधिकारिक पत्र जारी कर ब्रिक्स को महत्वपूर्ण बताते हुए स्थिति स्पष्ट की।
पी. चिदंबरम अपने राजनीतिक जीवन में कई मौकों पर तीखे बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा था कि यदि विरोधियों को ऐसा कहा जाता है, तो वे खुद को 'दिमागी नक्सल' कहने में गर्व महसूस करते हैं।
इसके अलावा, साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के वक्त उन्होंने कहा था कि अगर कश्मीर हिंदू-बहुल राज्य होता तो सरकार यह कदम नहीं उठाती, जिस पर भारी राजनीतिक बवाल मचा था।
साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों को लेकर भी चिदंबरम का एक बयान काफी चर्चित रहा था। उन्होंने स्वीकार किया था कि 2008 के हमलों के बाद वे स्वयं पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पक्ष में थे, लेकिन कूटनीतिक कारणों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते तत्कालीन यूपीए सरकार ने संयम बरतने का फैसला किया था।
आपको बता दें कि इन तमाम विवादों और तीखे विचारों के बावजूद, अपनी प्रशासनिक क्षमता, आर्थिक नीतियों की समझ और कानूनी ज्ञान के बल पर पी. चिदंबरम आज भी कांग्रेस के बौद्धिक ढांचे के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। उनको पार्टी दक्षिण भारत के नेताओं में प्रमुख स्थान देती है।