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लोकसभा में बड़ा धमाका: स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष ने चली चाल, सदन में मचा बवाल

Gaurav Gogoi Speech: विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, जिस पर सदन में तीखी बहस हुई और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।

प्रतीक पाण्डेय

Opposition No Confidence Motion: विपक्षी खेमे ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें पद से हटाने का संकल्प सदन में पेश कर दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जब कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखनी शुरू की, तो उनके शब्दों में संवैधानिक मर्यादा की चिंता झलक रही थी। विपक्षी दलों का यह कदम आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए गौरव गोगोई ने बड़े ही गंभीर लहजे में कहा कि उन्हें स्पीकर के खिलाफ यह प्रस्ताव लाने में कोई निजी खुशी नहीं हो रही है। उनका तर्क था कि पिछले कुछ समय से जिस तरह सदन की कार्यवाही संचालित हो रही है, उसे देखते हुए लोकतांत्रिक गरिमा और मर्यादा को बचाने के लिए यह प्रस्ताव लाना उनकी मजबूरी बन गई थी।

50+ सांसदों ने किया समर्थन

विपक्ष का सीधा आरोप था कि निष्पक्षता के जिस पैमाने पर अध्यक्ष को होना चाहिए, वहां अब कुछ खामियां नजर आने लगी हैं। जब 50 से अधिक सांसद इस संकल्प के समर्थन में अपनी सीटों पर खड़े हुए, तब जाकर पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया और सदन की अनुमति दी।

क्यों मचा पीठासीन सभापति पर हंगामा?

जैसे ही चर्चा आगे बढ़ी, तकनीकी और संवैधानिक बारीकियों पर सवाल उठने लगे। एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए एक नई बहस छेड़ दी। उनका कहना था कि चूंकि जगदंबिका पाल की नियुक्ति खुद ओम बिरला ने की है, इसलिए वे इस अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सभापति की भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकते। इस मांग को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय का भी भरपूर समर्थन मिला। वेणुगोपाल ने तो सरकार को घेरते हुए यहां तक कह दिया कि अब तक लोकसभा उपाध्यक्ष का निर्वाचन न कराकर एक 'संवैधानिक शून्यता' पैदा कर दी गई है। विपक्ष की मांग थी कि सदन को किसी ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो पूरी तरह तटस्थ होकर इस महत्वपूर्ण कार्यवाही का संचालन करे।

शाह और रिजिजू का पलटवार, विपक्ष पर लगाया आरोप

सत्ता पक्ष भी इस हमले पर शांत बैठने वाला नहीं था। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रसाद ने साफ किया कि नियमों के मुताबिक जो भी व्यक्ति आसन पर बैठा है, उसके पास अध्यक्ष की तरह ही सदन संचालन के पूर्ण अधिकार होते हैं।

जब आमने सामने आए शाह-गोगोई

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष असल में चर्चा करने से भाग रहा है और इसीलिए नियमों की आड़ ले रहा है। सदन में माहौल तब और गर्म हो गया जब गौरव गोगोई और अमित शाह आमने-सामने आ गए। गोगोई ने रिजिजू पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि रिजिजू ने भले ही कड़ा रुख अपनाया हो, लेकिन उन्होंने इतना 'गैर-जिम्मेदार विपक्ष' अपने पूरे राजनीतिक करियर में कभी नहीं देखा।

लोकसभा में इस अविश्वास प्रस्ताव पर पूरे 10 घंटे की मैराथन चर्चा तय की गई है, जो संसदीय इतिहास के उन पन्नों में दर्ज हो जाएगी जहां मर्यादा और अधिकारों की जंग खुलेआम लड़ी गई। एक तरफ जहां विपक्ष अपनी एकजुटता दिखाकर सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इसे केवल सदन की कार्यवाही में रोड़ा अटकाने की कोशिश बता रहा है।

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