Tiger Reserve Connectivity In 7 State: मध्य भारत में बाघों की लगातार बढ़ती मौतों ने वन्यजीव संरक्षण को नई चुनौतियों में डाल दिया है। इस स्थिति के मद्देनजर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) 7 राज्यों को जोड़ते हुए लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर के मेगा बाघ कॉरिडोर की योजना पर मंथन कर रहा है। यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, राजस्थान, ओडिसा और महाराष्ट्र के प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़कर बाघों के आवागमन और उनके संरक्षण को सुनिश्चित करने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है।
माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में बाघों लगातार मौतों को रोकने के लिए इस महत्त्वपूर्ण गलियारे को विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि बाघों का आवागमन एक जंगल से दूसरे जंगल तक आसानी से हो सके। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, संजय दुबरी, छत्तीसगढ़ का गुरू घासीदास अभयारण्य, झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व, बिहार के रोहताश, राजस्थान का मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, ओडिशा के सिमिलिपाल-सतकोसिया टाइगर रिजर्व और महाराष्ट्र के पेंच टाइगर रिजर्व के बीच एक बेहतर कॉरिडोर बनाकर 7 राज्यों की एक संयुक्त सुरक्षा फोर्स बनाने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) विचार कर रहा है। इससे सभी सातों राज्यों में बाघों का संरक्षण तो होगा ही, सुरक्षित माहौल भी मिल सकेगा।
करीब 30 हजार वर्ग किमी के इस क्षेत्र में बाघाें के संरक्षण के सशक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। वहीं महाराष्ट्र के पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा स्थिति मिश्रित है, यहां बाघों की आबादी में वृद्धि के कारण वे अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं और अच्छी तरह संरक्षित हैं। हालांकि, कारण रिजर्व के बफर जोन में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बाघ और इंसान दोनों के लिए जोखिम पैदा हो गया है।
मध्य प्रदेश में जंगल का दायरा बाघों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सीमित होता जा रहा है। ऐसे में बाघ अपनी नई टेरेटरी के लिए नया ठिकाना तलाश रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व की एक बुजुर्ग बाघिन ने डिंडौरी जिले के वन परिक्षेत्र पूर्व करंजिया को अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। 17 वर्ष की उम्रदराज बाघिन यहां शिकार भी कर रही है। अचानकमार से 50 किलोमीटर से ज्यादा लंबा रास्ता तय करके करंजिया पहुंचने वाली बाघिन ने विध्य-मैकल-छत्तीसगढ़ सतपुड़ा बाघ कारिडोर के जिंदा होने का सबूत दिया है। यह कारिडोर विध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है और इसमें मध्य प्रदेश (नर्मदापुरम, बैतूल) और छत्तीसगढ़ के जंगल शामिल हैं। इससे पहले भी दिसंबर 2024 में कान्हा टाइगर रिजर्व से छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व पहुंचे एक बाघ को देखा गया था। बाघ टी-200 कान्हा टाइगर रिजर्व का ही बाध था। अक्टूबर 2024 में ही पेच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन 400 किलोमीटर का रास्ता तय कर अचानकमार टाइगर रिजर्व पहुंच गई थी। 2024 में ही अचानकमार से एक बाघ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आ गया था, जो कुछ दिन वापस भी चला गया था।
मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 में 55 बाघों की मौतों की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है, इस बीच इस वर्ष चार माह में 32 बाघों की मौतों ने राज्य के वन्यजीव प्रबंधन को फिर कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। इस बीच मध्य प्रदेश में बाधों की मौतों पर अब एनटीसीए ने संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
यह भी पढ़ें:- ताडोबा टाइगर रिजर्व में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि, अब कैमरा शुल्क भी हुआ खत्म
वन विभाग का तर्क है कि इनमें अधिकांश मौतों का कारण विद्युत करंट और आपसी संघर्ष है। इनमें प्राकृतिक मौतें भी हुई है। इस पूरे मामले को लेकर मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा ने स्पष्ट किया है कि एनटीसीए के अधिकारियों ने बांधवगढ़ आकर बाधों की स्थिति जानी, अधिकांश मौते आपसी संघर्ष से हुई है। इसकी रिपोर्ट बनाकर एनटीसीए को भेज दी गई, इससे वह संतुष्ट है। पिछले दिनों मध्य प्रदेश में किसी बाघ ने भूख से तो किसी ने आपसी संघर्ष में दम तोड़ दिया। छह बाघों की मौत करंट लगने से हुई।
वहीं 5 बाघों की मृत्यु का कारण ही स्पष्ट नहीं हो पाया है। तीन बाघों की मृत्यु बीमारी के कारण हुई है। मृत बाधों में 11 नर, 15 मादा, तीन शावक शामिल है। मई में ही तीन बाघों की मृत्यु हो गई, यह तीनों ही नर बाघ थे।