BRICS On Mental Wellbeing: भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एकजुट होकर 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को स्वीकार किया गया है। घोषणा में मानसिक स्वास्थ्य के लिए ट्रेनिंग हब और 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का नेटवर्क बनाने में सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अनुसार बेंगलुरु स्थित 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज' को कोऑर्डिनेटिंग सेंटर बनाया जाएगा।
नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का यह नेटवर्क ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर रिसर्च करने, पॉलिसी पर बातचीत करने, बेहतरीन तरीकों के एक्सचेंज और सबूतों पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली रणनीतियों पर मिलकर काम करेगा। इससे मानसिक स्वास्थ्य पर मिलकर काम करने के लिए एक मंच मिल पाएगा।
घोषणापत्र के अनुसार, BRICS के हर सदस्य देश के प्रतिनिधियों का एक खास समूह मिलकर इस नेटवर्क को चलाएगा। यह समूह यह तय करेगा कि प्राइमरी हेल्थकेयर में मानसिक स्वास्थ्य को टिकाऊ और बड़े पैमाने पर शामिल करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग हासिल करने की दिशा में "संतुलित फ़सले लेने और साझा जवाबदेही" बनी रहे। इसमें संकटों के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से निपटने के महत्व पर जोर दिया गया है।
घोषणापत्र के अनुसार मानसिक रूप से अस्वस्थ्य लोग विषेकर बच्चों और किशोरों जैसे कमजोर हालात वाले लोगों को समय पर, आसानी से उपलब्ध होने वाली और लगातार मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता दिया जाएगा। इसके अलावा, यह घोषणा गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases) से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर भी ध्यान देती है और 'स्वस्थ जीवन शैली के लिए ब्रिक्स मिशन' तथा 'स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने की संयुक्त पहल के लिए ब्रिक्स रोडमैप (2026-29)' की शुरुआत का समर्थन करती है।
घोषणापत्र में पारंपरिक और इंटीग्रेटिव मेडिसिन की बढ़ती अहमियत के बारे में भी बात की गई है। ब्रिक्स देशों का कहना है कि हम सदस्य देशों के बीच बातचीत, सहयोग और आदान-प्रदान के लिए एक मंच के तौर पर, BRICS हेल्थ ट्रैक के तहत TCIM पर BRICS एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप बनाने के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं। यह मंच इलाज और बीमारी से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों पर रिसर्च में तालमेल बिठाएगा।