Shivraj Singh Chouhan In Navbharat Conclave: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है। हाल ही में आयोजित 'नवभारत कॉन्क्लेव' में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की तरक्की का विस्तृत खाका पेश किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की वैश्विक ताकत बनने की राह हमारे गांवों से होकर गुजरती है और इसी सोच के साथ सरकार 'वसुधैव कुटुंबकम' के भाव से हर नागरिक के कल्याण में जुटी है।
देश के कई हिस्सों में अलनीनो के प्रभाव के कारण कम बारिश दर्ज की गई है, जो खेती के लिए एक बड़ी चुनौती है। आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य के मुकाबले अब तक 24% कम बारिश हुई है, जिससे लगभग 91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई प्रभावित हुई है।
इस संकट से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने देश के 311 संवेदनशील जिलों की पहचान की है। इन जिलों के लिए एक विशेष 'कंटेंसी प्लान' तैयार किया गया है, जिसके तहत किसानों को कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ग्रामीण विकास को गति देने के लिए 1 जुलाई से पूरे देश में 'विकसित भारत जनमन' योजना को सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुल 1,51,282 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 95,600 करोड़ रुपये है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब ग्रामीणों को मनरेगा के तहत 100 दिन के बजाय 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार दिया जाएगा। मंत्री चौहान ने इसे सहकारी संघवाद की जीत बताया, क्योंकि सभी राज्यों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस योजना का समर्थन किया है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार छह प्रमुख स्तंभों पर काम कर रही है। जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, उपज का सही दाम दिलाना, नुकसान की भरपाई, खेती का विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना। भारत ने चावल उत्पादन में 41% की वृद्धि कर चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। छोटे किसानों को समृद्ध बनाने के लिए सरकार उन्हें फल, सब्जी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
किसानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए सरकार जल्द ही नया 'सीड एक्ट' और 'पेस्टिसाइड एक्ट' लाने वाली है। इन कानूनों में नकली खाद और घटिया बीज बेचने वालों के लिए कठोर दंड और सजा के प्रावधान होंगे।
यह भी पढ़ें- अगर राजनीति में नहीं तो… कहां होते सिंधिया, नवभारत कॉन्क्लेव में खुद बताया, इस शख्स ने किया प्रभावित
इसके साथ ही, 'सारथी पोर्टल' जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए बीजों की ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसान असली और नकली के बीच फर्क कर सकें। मिट्टी की उर्वरकता को बचाने के लिए रासायनिक खाद के बजाय संतुलित खाद और प्राकृतिक खेती पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
https://youtu.be/QjBCmVD-Ij8?si=lS4ncu6Z4PO76Ccf