Nagaland Mokokchung Landslide Two Brothers Death: पूर्वोत्तर भारत के राज्य नागालैंड में मानसून ने इस साल रौद्र रूप धारण कर लिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के मोन और मोकोकचुंग जिलों में हुए अलग-अलग भूस्खलनों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कुल मिलाकर 10 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। मलबे के नीचे कई मकान जमींदोज हो गए हैं और राहत कार्य तेजी से जारी हैं।
नागालैंड के मोन जिले से सबसे दुखद खबर सामने आई है जहां अचानक हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से यहाँ कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब लोग सो रहे थे। पिछले कई दिनों से जारी बारिश की वजह से पहाड़ी ढलानों की मिट्टी बेहद कमजोर हो गई थी जिसके कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा रिहायशी इलाके पर गिर गया। इस तबाही में कई घर मलबे में तब्दील हो गए हैं और कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
भूस्खलन का एक और हृदयविदारक मामला मोकोकचुंग कस्बे के अपर पेनली वार्ड में सामने आया है। यहां एक किराए के मकान पर मलबा गिरने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 19 वर्षीय मुवालोंग सांगतम (कक्षा 12 का छात्र) और 16 वर्षीय थ्रिदिबा सांगतम (कक्षा 11 का छात्र) के रूप में हुई है। ये दोनों क्वीन मैरी हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र थे। इस हादसे में उनकी माँ भी घायल हुई हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। दोनों भाइयों के शवों को उनके पैतृक गांव एलिसोपुर (तुएनसांग जिला) ले जाया गया है।
तबाही की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास कर रही हैं। राज्य सरकार ने इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए ₹4 लाख की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुँचाने और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं।
नागालैंड के लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले कुछ दिनों तक नागालैंड और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और आपदा के समय सतर्क रहने की सलाह दी है।
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पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा के साथ-साथ पहाड़ों की कटाई और कमजोर होती ढलानें इन हादसों का मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और वैज्ञानिक तरीके से विकास कार्यों को अंजाम देना अनिवार्य है। नागालैंड की यह त्रासद घटना हमें याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है।