Modi Putin Global Peace: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनके साथ द्विपक्षीय वार्ता की। पीएम मोदी ने वैश्विक चिंताओं के बीच विश्व शांति पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत तटस्थ (Neutral) नहीं है, बल्कि वैश्विक कल्याण के लिए शांति के हर प्रयास का पक्षधर है। पुतिन ने भी पीएम मोदी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि रूस भी शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशों के साथ है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत पर अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर दोनों देश अपने रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बातचीत की शुरुआत की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीडिया के सामने रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शांति पर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है। हम शांति के हर प्रयासों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।"
पीएम मोदी ने विश्वास को एक बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि वह समझते हैं कि विश्व का कल्याण शांति के मार्ग से ही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जल्द ही विश्व को अपनी चिंताओं से मुक्ति मिलेगी और दुनिया शांति की दिशा में फिर से लौटेगी। पीएम मोदी के इस बयान से यह साफ हो गया कि भारत अमेरिका के दबाव में काम नहीं करेगा और विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका जारी रखेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के शांति संदेश पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी अपनी सहमति जताई। पुतिन ने आमंत्रण के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया और उनकी बात पर आते हुए कहा कि शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशें जारी हैं। पुतिन ने यह भी पुष्टि की कि रूस भी शांति का पक्षधर है और शांति के हर प्रयास के साथ है।
दोनों नेताओं के बयानों से यह जाहिर होता है कि विश्व शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के संबंधों की अग्निपरीक्षा थी, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के प्रति भरोसा और साझेदारी की निरंतरता को दर्शाया है।
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यह उच्च-स्तरीय बैठक दोनों देशों की आपसी निर्भरता को भी उजागर करती है। रक्षा सौदों, सस्ते तेल और तकनीक के लिए भारत रूस पर निर्भर है, लेकिन साथ ही वह अमेरिका की नाराजगी भी नहीं चाहता है। वहीं, रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत जैसा भरोसेमंद और बड़ा बाजार चाहिए। आज दिनभर की चर्चाओं में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर समझौते होने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे।