शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (सोर्स- सोशल मीडिया ) 
देश

'...स्वागत योग्य कदम है' शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की मोदी की तारीफ, बोले- नाम मिटा देना चाहिए

Somnath Mandir: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने पीएम नरेंद्र मोदी के ब्लॉग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जहां भी ग़ज़नवी का नाम आता है, उसे मिटा देना चाहिए।

अभिषेक सिंह

Shankaracharya Avimukteshwaranand: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखकर 1026 में महमूद ग़ज़नवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमले का ज़िक्र किया है और उस हमले के बाद से 1000 साल के सफर पर विचार किया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जहां भी ग़ज़नवी का नाम आता है, उसे मिटा देना चाहिए।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट 1000 साल पहले सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के दर्द को दिखाती है। महमूद ग़ज़नवी नाम का एक आदमी अपनी छोटी सी सेना लेकर आया और उसने मंदिर पर हमला किया और उसे नुकसान पहुंचाया।

और क्या कुछ बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

उन्होंने आगे कहा कि महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा कर रहे पुजारियों को घायल किया और भक्तों को भी चोट पहुंचाई। उसने यह सोचकर मंदिर को नुकसान पहुंचाया कि अगर वह मंदिर और उसकी मूर्तियों को नष्ट कर देगा, तो सोमनाथ खत्म हो जाएगा। यह कोशिश हज़ार साल पहले की गई थी।

...तो स्वागत योग्य कदम है: अविमुक्तेश्वरानंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट हमें यह संदेश देती है कि आप मंदिर तोड़ सकते हैं, आप मूर्तियां तोड़ सकते हैं, लेकिन आप सोमनाथ को खत्म नहीं कर सकते। हज़ार साल बाद भी सोमनाथ खड़ा है। इसलिए भविष्य में जो लोग ऐसा सोचते हैं, उन्हें यह नहीं दोहराना चाहिए। अगर उनका यही संदेश है तो यह एक स्वागत योग्य कदम है।

ग़ज़नवी का नाम-ओ-निशां मिटा देना चाहिए

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जहां तक ​​ग़ज़नवी की बात है, उसने निश्चित रूप से कुछ भी अच्छा नहीं किया, इसलिए भारत में जहां भी ग़ज़नवी का नाम आता है, उसे मिटा देना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर भारत के प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर को याद करते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में हिस्सा लेंगे PM

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के मशहूर सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद से 1000 साल के सफ़र पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक ब्लॉग लिखा। पीएम ने कहा कि ग़ज़नवी के हमले से शुरू हुई तबाही की श्रृंखला के बावजूद, मंदिर को बार-बार बनाया गया। उन्होंने कहा कि वह 11 जनवरी को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में हिस्सा लेंगे और पूजा-अर्चना करेंगे।

इस पोस्ट में पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भी आलोचना की, जिन्होंने मंदिर के उद्घाटन समारोह से खुद को दूर रखा था और कहा था कि वह नहीं चाहते कि संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति किसी धार्मिक कार्यक्रम से जुड़े। लेकिन क्या वह मस्जिद या चर्च के लिए भी ऐसा ही करते?"

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