मौलाना अरशद मदनी  (सोर्स- सोशल मीडिया)
देश

इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत नहीं मिटा सकती, मस्जिदों पर मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान

Maulana Arshad Madani: मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत मिटा नहीं सकती। उन्होंने मुसलमानों से सब्र और एकता बनाए रखने की अपील की।

मनोज आर्या

Highlights:

  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों पर बड़ा बयान दिया है।

  • उन्होंने कहा कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन फिर आबाद होंगी।

  • मदनी ने आरोप लगाया कि इस्लाम और धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।

Maulana Arshad Madani: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों को लेकर एक बयान दिया है, जो अब काफी चर्चा में है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन फिर आबाद होंगी और वहां दोबारा 'अल्लाहु अकबर' की सदाएं बुलंद होंगी। मदनी ने कहा कि जो आज सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे, क्योंकि सरकारें आती-जाती रहती हैं।

अरशद मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत न तो मिटा सकी है और न ही भविष्य में मिटा सकेगी।

'धार्मिक संस्थानों को निशान बना रही सरकार'

मौलाना अरशद मदनी ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, लेकिन मौजूदा सरकार मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम से सबक लेने की नसीहत देते हुए कहा कि इस्लाम को मिटाने का सपना देखने वाले खुद इतिहास का हिस्सा बन गए, लेकिन इस्लाम आज भी जिंदा है।

मदरसों की भूमिका पर मदनी का बयान

मदरसों की भूमिका पर जोर देते हुए अरशद मदनी ने कहा कि मदरसे इस्लामिया धर्म और ईमान के रक्षक तथा धार्मिक पहचान के अमानतदार हैं। हालांकि, नई पीढ़ी के ईमान, आस्था और नैतिकता की रक्षा करना केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि माता-पिता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

उन्होंने मुसलमानों से मौजूदा परिस्थितियों से निराश नहीं होने की अपील की। मदनी ने कहा कि मुसलमानों को सब्र, एकता, हिकमत और दृढ़ता के साथ अपने धर्म और ईमान पर मजबूती से कायम रहना चाहिए।

'सहारनपुर में मस्जिद को गिराना दुखद'

बता दें कि इससे पहले, अरशद मदनी ने पांच सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराए जाने की घटना पर गहरा अफसोस जताते हुए इसे संविधान, कानून के शासन और समान न्याय के सिद्धांत पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया था।

अरशद मदनी ने कहा था कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराया जाना बेहद दुखद है। उनका कहना था कि इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह मूल सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं, तो उनके लागू होने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है।

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