21 अक्टूबर 1959 को शहीद हुए जवान (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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जानिए क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस? चीनियों ने की थी भारतीय जवानों के साथ बर्बरता, यहां पढ़ें पूरी दास्तान

देश में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस साल यानी 21 अक्टूबर 2024 को भारत 65वां पुलिस स्मृति दिवस मना रहा है। लेकिन क्या आपको यह पता है कि यह क्यों मनाया जाता है और कब इसकी शुरुआत हुई?

अभिषेक सिंह

नवभारत डेस्क: देश में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस साल यानी 21 अक्टूबर 2024 को भारत 65वां पुलिस स्मृति दिवस मना रहा है। इस दिन को पुलिस-अर्धसैनिक बलों से जुड़े सभी लोग पुलिस शहादत दिवस या पुलिस परेड दिवस के नाम से भी जानते हैं। यह दिन हर साल पूरे भारत में उन पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

पुलिस स्मृति दिवस 1959 के उस दिन की याद में मनाया जाता है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग इलाके में चीनी सैनिकों ने बीस भारतीय जवानों पर हमला किया था, जिसमें दस भारतीय पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी और सात को जेल में डाल दिया गया था। उस दिन से लेकर अब तक शहीदों के सम्मान में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

क्या है पूरी दास्तान?

तिब्बत में चीन के साथ भारत की 2,500 मील लंबी सीमा लगती है। 21 अक्टूबर 1959 को इस सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत के पुलिसकर्मियों पर थी। चीनी घात से ठीक एक दिन पहले 20 अक्टूबर 1959 को भारत ने तीसरी बटालियन की एक कंपनी को उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में तैनात किया था। इस कंपनी को तीन टुकड़ियों में बांटकर सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। हमेशा की तरह इस कंपनी के जवान नियंत्रण रेखा पर गश्त करने निकले थे।

20 अक्टूबर को दोपहर तक तीन टुकड़ियों में से दो के जवान वापस लौट आए। लेकिन तीसरी टुकड़ी के जवान 21 अक्टूबर की सुबह तक वापस नहीं लौटे। 21 अक्टूबर की सुबह तक वापस नहीं लौटने वाली टुकड़ी के जवानों की खोज के लिए तलाशी अभियान की योजना बनाई गई। जिसे तत्कालीन डीसीआईओ करम सिंह ने लीड किया। इस टुकड़ी में करीब 20 जवान थे। करम सिंह घोड़े पर सवार थे और बाकी जवान पैदल मार्च कर रहे थे। पैदल चल रहे जवानों को 3 अलग-अलग टुकड़ियों में बांटा गया था।

घात लगाकर हमला

तलाशी अभियान के दौरान ही चीनी सैनिकों ने घात लगाकर एक पहाड़ के पीछे से फायरिंग शुरू कर दी। अपने साथी की तलाश में निकले भारतीय सैनिक हमले के लिए तैयार नहीं थे। उनके पास जरूरी हथियार नहीं थे। इस हमले में 10 सैनिक शहीद हो गए और ज्यादातर सैनिक घायल हो गए, 7 की हालत गंभीर थी। लेकिन चीन यहीं नहीं रुका, चीनी सैनिकों ने गंभीर रूप से घायल सैनिक को बंदी बना लिया। बाकी सैनिक किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे।

क्यों मनाया जाता है स्मृति दिवस

13 नवंबर 1959 को शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों की डेड बॉडी चीनी सैनिकों ने लौटा दी। भारतीय सेना ने हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ उन 10 सैनिकों का अंतिम संस्कार किया। इन शहीदों के सम्मान में भारत में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। पुलिस स्मृति दिवस पर देश के सुरक्षा बल, चाहे वो राज्य पुलिस हो, केंद्रीय सुरक्षा बल हो या अर्धसैनिक बल हो, सभी मिलकर इस दिन को मनाते हैं।

1960 में हुई शुरुआत

पुलिस स्मृति दिवस की शुरुआत साल 1960 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों के वार्षिक सम्मेलन में की गई थी। भारत सरकार ने इस घटना में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया और देश के लिए अपनी जान गंवाने वाले इन सभी पुलिसकर्मियों के सम्मान में हर साल 21 अक्टूबर को स्मृति दिवस मनाने का फैसला किया गया। वहीं, साल 2000 से हर साल इस दिन पुलिस परेड का आयोजन किया जाता है और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

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