केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए खुशी और गम दोनों (कॉन्सेप्ट फोटो- सोशल मीडिया) 
देश

शशि थरूर ने कांग्रेस को हरवाया, अब राहुल दिखाएंगे बाहर का रास्ता? जानें केरल में क्या खिचड़ी पक रही

Kerala के निकाय चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने बढ़त तो बनाई, लेकिन Shashi Tharoor के लोकसभा क्षेत्र तिरुवनंतपुरम में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। यहां BJP का जबरजस्त प्रदर्शन रहा।

सौरभ शर्मा

BJP Win Shashi Tharoor's Thiruvananthapuram: केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए खुशी और गम दोनों लेकर आए हैं। जहां एक तरफ राज्य भर में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बढ़त बनाई है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के दिग्गज नेता शशि थरूर को अपने ही घर में बड़ा झटका लगा है। तिरुवनंतपुरम, जो थरूर का लोकसभा क्षेत्र है, वहां कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस हार ने न केवल थरूर के सियासी कद पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उनके और पार्टी आलाकमान के बीच चल रही तनातनी को और हवा दे दी है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर कांग्रेस इस हार के बाद थरूर पर कोई सख्त एक्शन लेती है, तो शायद यह उनके मनमुताबिक ही होगा। पिछले काफी समय से थरूर के बागी तेवर किसी से छिपे नहीं हैं। चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में बयान देना हो या फिर राहुल गांधी की बैठकों से दूरी बनाना, थरूर लगातार ऐसे संकेत दे रहे हैं कि वह अपने लिए नए विकल्प खुले रख रहे हैं। स्थानीय चुनावों में भाजपा की यह जीत उनके लिए एक बड़ा इशारा मानी जा रही है और इसे थरूर के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

भाजपा का बदला और सावरकर कनेक्शन

तिरुवनंतपुरम में भाजपा की यह जीत प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखरन के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में थरूर से मिली हार का गम इस जीत ने काफी हद तक कम कर दिया है। उधर, चुनावों से ठीक पहले थरूर को वीर सावरकर पुरस्कार देने के ऐलान ने भी सियासी पारा चढ़ा दिया था। भले ही उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस घटना ने उनके क्षेत्र के वोटरों के बीच एक खास संदेश जरूर पहुंचा दिया। थरूर के बदले सुर और भाजपा की यह जीत एक नई कहानी बयां कर रही है।

क्या 2026 के लिए तैयार हो रही नई बिसात?

शशि थरूर बखूबी जानते हैं कि वह पार्टी लाइन से हटकर आग से खेल रहे हैं। उनकी महत्वाकांक्षाएं अब राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने की हैं, लेकिन अपने ही संसदीय क्षेत्र में खराब प्रदर्शन ने उनकी राह मुश्किल कर दी है। अटकलें हैं कि अगर कांग्रेस उन्हें निकालती है, तो वे इस्तीफा देकर उपचुनाव की नौबत ला सकते हैं। जानकार मानते हैं कि ऐसे हालात में थरूर भाजपा से लोकसभा या 2026 में विधानसभा टिकट के लिए बात कर सकते हैं, जिससे केरल के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

Sunita Williams भारत की वो बेटी जिसने दो बार मनाया अतंरिक्ष में जन्मदिन, प्रेरणा से भरी है कहानी

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को दी चुनौती, फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची, नाम और सिंबल पर विवाद तेज

भस्मासुर है कांग्रेस…राहुल को पढ़ना चाहिए अपनी पार्टी का इतिहास, सहयोगियों को खत्म करना आदत: किरेन रिजिजू

तमिलनाडु में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा सोने का छल्ला, CM विजय ने किया ऐलान, वितरण के लिए बनेंगे 107 हब

DUSU Election 2026 LIVE: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान समाप्त