Karnataka News: कर्नाटक में गन्ना किसानों से जुड़ा मुद्दा गरमाता जा रहा है। अब इस मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि गन्ना मूल्य संबंधी मुद्दों के लिए केंद्र को दोषी ठहराना न केवल "अन्यायपूर्ण" है, बल्कि एक "क्रूर मज़ाक" भी है।
आपको बता दें कि कर्नाटक के उत्तरी ज़िलों के किसान गन्ने के लिए 3,500 रुपये प्रति टन के खरीद मूल्य की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर सिद्धारमैया ने गुरुवार को कहा कि निष्पक्ष और लाभकारी मूल्य निर्धारण (FRP) का फैसला राज्य सरकार नहीं बल्कि केंद्र सरकार करती है। जिस पर सियासत गरमा गई है।
शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में, जोशी ने सिद्धारमैया को इस संबंध में लिखा एक पत्र साझा किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के किसानों के कल्याण के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। देश के गन्ना किसानों की मदद और लाभ के लिए विभिन्न नीतिगत पहल की गई हैं।
प्रह्लाद जोशी ने लेटर में आठ बिंदुओं पर सिद्धारमैया को घेरा है। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर प्रत्येक चीनी मौसम (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) गन्ने की उत्पादन लागत से लेकर चीनी और उप-उत्पादों के बाजार मूल्य, चीनी की रिकवरी दर, किसानों के लिए उचित मार्जिन, वैकल्पिक फसलों से लाभ, परिवहन लागत आदि जैसे विभिन्न कारकों पर विचार करता है।
2025-26 के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल का स्वीकृत एफआरपी सभी गन्ना उत्पादक राज्यों के लिए उत्पादन लागत को कवर करता है और उत्पादन लागत पर 105.2 प्रतिशत का मार्जिन देता है। रिकवरी में प्रत्येक 0.1% की वृद्धि के साथ, किसानों को प्रति क्विंटल 3.46 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। कर्नाटक में 10.5% की औसत रिकवरी पर, एफआरपी 363 रुपये प्रति क्विंटल होगा। पिछले दशक में एफआरपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जिसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2025-26 के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल का एफआरपी 210 की घोषणा 2013-14 में की गई थी, जिससे उत्पादन लागत पर 79.2 प्रतिशत का मार्जिन प्राप्त हुआ।
इससे पहले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने भी सिद्धारमैया को घेरते हुए कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए एसएपी (राज्य परामर्श मूल्य) कानून के तहत गन्ने की कीमतें तय करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उसने अब तक इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया है।
शनिवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस प्रावधान का इस्तेमाल करते हैं और किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित करते हैं, तो इससे गन्ना मूल्य मुद्दे का निष्पक्ष और वैध समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में गन्ने का उचित मूल्य निर्धारित करने के लिए एसएपी कानून बनाया था।
इस कानून के तहत, राज्य सरकार को विशिष्ट मानदंडों के आधार पर मूल्य तय करने का पूरा अधिकार है - जिसमें गन्ने की खेती की लागत, चीनी उत्पादन, उप-उत्पादों का उत्पादन, बाजार मूल्य और किसानों और कारखाना मालिकों के बीच लाभ का हिस्सा शामिल है। अभी तक, राज्य सरकार ने इन शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने सलाह दी कि अगर मुख्यमंत्री इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं और किसानों के साथ न्याय करते हैं, तो इससे समस्या का वैध और संतुलित समाधान निकल सकता है।
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बोम्मई ने कहा कि बेलगावी ज़िले के उपायुक्त ने चीनी मिल मालिकों के साथ बैठक की और गन्ने की प्रति टन कीमत 2,900 रुपये से बढ़ाकर 3,200 रुपये करने में कामयाब रहे, जिससे किसानों का विश्वास जीत लिया। इसके विपरीत, हमारे माननीय मुख्यमंत्री ने कड़ी मेहनत और दिन भर की बैठकों के बाद, 3,200 रुपये से ऊपर केवल 50 रुपये प्रति टन की वृद्धि का प्रस्ताव रखा, जिस पर कुछ मिल मालिक सहमत हुए और कुछ नहीं।