कर्नाटक को नाटक बता भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला 
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'जो दिल्ली का खजाना भरेगा, कुर्सी उसकी', कर्नाटक में कांग्रेस के कलेश पर भाजपा का तीखा हमला

Karnataka की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। Congress सरकार के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी अब जगजाहिर हो चुकी है जिस पर अब BJP ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सौरभ शर्मा

BJP Attack on Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी अब जगजाहिर हो चुकी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। भाजपा ने राज्य में चल रहे इस सियासी घटनाक्रम को महज एक 'नाटक' करार दिया है। भाजपा नेता और पूर्व सांसद बूरा नरसैया गौड़ ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कुर्सी की नहीं, बल्कि इस बात की है कि दिल्ली दरबार में कौन ज्यादा पैसे पहुंचा सकता है।

गौड़ ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने जानबूझकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच यह होड़ लगवाई है। उनका आरोप है कि हाईकमान का मकसद सिर्फ इतना है कि दोनों नेताओं को सीएम पद का लालच देकर उनसे ज्यादा से ज्यादा धन वसूला जा सके। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के इस 'सत्ता और पैसे के संघर्ष' ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। विकास दर लगातार गिर रही है और पूरा कर्नाटक अराजकता के गर्त में डूबता जा रहा है, जिसका सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

विधानसभा भंग करने की मांग से हड़कंप

यह कलह तब और गहरा गई जब 20 नवंबर को सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल पूरा हुआ। इसके बाद डीके शिवकुमार के समर्थकों ने उन्हें बचे हुए समय के लिए सीएम बनाने की मांग तेज कर दी है। मामला इतना बढ़ गया कि वरिष्ठ कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने एक विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि अगर फैसला नहीं हो पा रहा है, तो विधानसभा भंग कर चुनाव का सामना करना चाहिए। उनका सुझाव था कि दोबारा चुनाव लड़कर डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बहुमत लाएं और उन्हें पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री बनाएं, ताकि रोज-रोज का झगड़ा खत्म हो और स्थिति स्पष्ट हो सके।

सिद्धारमैया की सफाई और दिल्ली की दौड़

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कुर्सी को लेकर चल रही इन सभी चर्चाओं को 'अनावश्यक' बताया है। उन्होंने सफाई दी कि पार्टी के अंदर सिर्फ मंत्रिमंडल फेरबदल और दो खाली पदों को भरने को लेकर बात हो रही है, न कि नेतृत्व परिवर्तन पर। वहीं, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पार्टी अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए बताया कि वह इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए 29 नवंबर को सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे। भाजपा का मानना है कि जनता अब इस सरकार की अस्थिरता से ऊब चुकी है और बदलाव चाहती है।

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