कर्नाटक में जाति सर्वे पर सियासी संग्राम (फोटो- सोशल मीडिया) 
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कर्नाटक में जाति सर्वे पर सियासी संग्राम, मोदी के मंत्री बोले- 'कांग्रेस जनता का डेटा बेच सकती है'

karnataka में Caste Census को लेकर BJP लंबे वक्त से हमलावर हैं। इसको लेकर मोदी सरकार में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने आंकड़ों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला।

सौरभ शर्मा

Karnataka Caste Survey Controversy: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा कराए जा रहे सामाजिक एवं शैक्षिक सर्वेक्षण, जिसे जाति आधारित गणना भी कहा जा रहा है, पर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि सर्वेक्षण के जरिए जुटाए जा रहे आंकड़ों को बेचा जा सकता है। उन्होंने सर्वे की मंशा और डेटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे यह कवायद अब विवादों के केंद्र में आ गई है। जोशी के इस बयान ने कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

प्रह्लाद जोशी ने हुबली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यह सिर्फ जाति आधारित सर्वेक्षण नहीं है, बल्कि इसके जरिए कई अवांछित और निजी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सर्वे में कुल 60 प्रश्न हैं, जिनमें लोगों की आय, चुकाए गए आयकर, घर में विधवाओं की संख्या और सामाजिक संगठनों की सदस्यता जैसे बेहद निजी सवाल शामिल हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन विवरणों का आखिर क्या किया जाएगा, जबकि दावा केवल जातिगत आंकड़े जुटाने का था। यह पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।

कांग्रेस की मंशा और इतिहास पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगभग दो दशकों से जाति आधारित गणना की बात कर रही है, लेकिन कभी इसे लेकर गंभीर नहीं रही। उन्होंने याद दिलाया कि इसकी शुरुआत 2004-2006 में दिवंगत एन धरम सिंह के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के समय हुई थी। जोशी ने कहा, "कांग्रेस सरकार ने 2013 में इस पर पैसा खर्च किया, लेकिन 2018 तक कुछ नहीं किया।" उन्होंने दावा किया कि 2023 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने फिर से सर्वे की बात की और 174 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद उसे छोड़ दिया, और अब कहा जा रहा है कि कुछ जातियों को हटा दिया गया है।

क्या सुरक्षित हैं आपके आंकड़े?

प्रह्लाद जोशी ने आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ी चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया, "आंकड़ों को सुरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन क्या यह सुरक्षित है?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सभी विवरण एकत्र करने के लिए गणकों (सर्वे करने वालों) पर दबाव बना रही है और उन्हें धमका रही है। जोशी के इन आरोपों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या जनता की निजी जानकारी सरकारी तंत्र में सुरक्षित है। बता दें कि यह सर्वेक्षण 22 सितंबर को शुरू हुआ है और 7 अक्टूबर तक चलेगा, जिस पर अनुमानित 420 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

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