Highlights:
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट का प्रक्षेपण।
NVS-03 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित करने का लक्ष्य।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसको को दी बधाई।
NavIC Navigation System: ISRO ने GSLV-F18 रॉकेट से NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किया। इससे भारत की स्वदेशी NavIC प्रणाली मजबूत होगी और नेविगेशन सेवाओं की क्षमता बढ़ेगी।
ISRO ने GSLV-F18 यान, NVS-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया। NVS-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है, जिसे IRNSS श्रृंखला के लिए नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।
इस सैटेलाइट में आयातित और स्वदेशी, दोनों तरह की परमाणु घड़ियां लगी हैं। मौजूदा L5/S सिग्नलों के अलावा, इसमें L1 सिग्नल भी शामिल है, जो भारत की मुख्य भूमि और उसकी भू-राजनीतिक सीमाओं के आसपास 1500 km के क्षेत्र को कवर करता है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने इसको को बधाई दी। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, "NVS-03 को ले जाने वाले GSLV-F18 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO के हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।"
पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे लिखा, "यह मिशन हमारी स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, NavIC को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर क्षमताओं से लैस, NVS-03 महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता की हमारी कोशिशों को आगे बढ़ाएगा और ऐसी नेविगेशन सेवाओं में मदद करेगा जिनसे हमारे लोगों को लाभ मिलता है। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का समर्पण और उनकी प्रतिभा लगातार हमारे देश को गौरवान्वित कर रही है।"
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का GSLV रॉकेट शुक्रवार देर रात यहां स्थित अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। यह अपने साथ अगली पीढ़ी का नेविगेशन सैटेलाइट 'NVS-03' ले गया है। 24 घंटे के काउंटडाउन के बाद, 50 मीटर ऊंचे GSLV-F18 रॉकेट ने तय समय के अनुसार रात 11:51 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी।
420 टन वजनी यह तीन-चरण वाला रॉकेट, लगभग 2,232 किलोग्राम वजनी 'NVS-03' सैटेलाइट को 'जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट' में स्थापित करने के मिशन पर है।
ISRO के अनुसार, 'NVS-03' अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है। इसे IRNSS सीरीज के तहत दी जाने वाली नेविगेशन सेवाओं को लगातार जारी रखने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया, "इस सैटेलाइट में बाहर से मंगाई गई एटॉमिक क्लॉक (परमाणु घड़ियां) और स्वदेशी रूप से विकसित एटॉमिक क्लॉक, दोनों लगी हैं। इसमें मौजूदा L5/S-बैंड सिग्नलों के अलावा, L1-बैंड सिग्नल भी शामिल किए गए हैं। इससे पूरे भारतीय भू-भाग और देश की सीमाओं से 1,500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र में नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।"