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CTI ने अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे समेत INDIA गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखा है।
संगठन ने 1 नवंबर की रैली को 10-11 नवंबर के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है।
CTI का दावा है कि रैली से दिल्ली के 20 बाजारों में हजारों करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
CTI Demand to Postpone Delhi Rally: चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने INDIA गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखकर रैली स्थगित करने की मांग की है। इनमें अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे का नाम शामिल हैं।
इंडिया गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली रैली को 10-11 नवंबर के बाद के लिए टाल दिया जाए। CTI ने पार्किंग की कमी और ट्रैफिक में संभावित रुकावट का हवाला देते हुए कहा है कि दिवाली के दौरान इस रैली से 20 बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
वहीं इससे पहले दूसरी ओर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे समेत अन्य नेता 1 नवंबर को रामलीला आने का ऐलान कर चुके है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्यापारियों की मांगें सुनी जाएगी या विपक्ष अपनी रैली की जिद पर अड़ा रहेगा।
CTI की ओर से दिल्ली के 20 लाख व्यापारियों की ओर से इंडिया गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखा। इसमें बताया कि इससे पहले 3 पत्र CTI राहुल गांधी को भी लिखा गया लेकिन उन्होंने 1 नवंबर को ही रैली करने की जिद पकड़ रखी है।
इसलिए उन्होंने नेताओं से अपील की है कि वे राहुल गांधी और कांग्रेस को समझाएं कि दिवाली के पीक सीजन में 10 लाख लोगों की महारैली करने से दिल्ली के व्यापारियों की दिवाली, काली हो सकती है, इसलिए रैली को दिवाली तक टालने का प्रस्ताव इंडिया गठबंधन की मीटिंग में लाया जाए।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित 10 लाख लोगों की महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। दिल्ली के 20 लाख व्यापारियों की ओर से मांग है कि इस रैली को दिवाली बाद 10-11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, 'हम रैली का विरोध नहीं कर रहे, हम दिवाली के पीक सीजन में अपनी रोजी रोटी बचाने के लिए हाथ जोड़कर विनती कर रहे हैं।
6 नवंबर को धनतेरस है और 8 नवंबर को दिवाली है। 1 नवंबर उसकी तैयारी का सबसे पीक दिन है। अगर 1 नवंबर को 10 लाख लोग और 15-20 हजार वाहन मध्य दिल्ली में आए तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप्प हो जाएगा।
रामलीला मैदान में 200 बड़ी बसों की भी पार्किंग नहीं है। 10 लाख लोगों को लाने के लिए 15,000 से 20,000 बसें, कारें, टेम्पो की जरूरत पड़ेगी, ये सभी वाहन JLN मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट, चांदनी चौक रोड़ और इन सभी बड़े बड़े बाजारों के इर्द गिर्द खड़े होंगे तब भी जगह थोड़ी पड़ जाएगी, इससे सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली में चक्का जाम और लॉकडाउन जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
5 KM के दायरे में 20 ऐतिहासिक होलसेल एवं रिटेल बाजार जहां रोजाना 10-12 हजार करोड़ का कारोबार होता है, रामलीला मैदान के 5 KM दायरे में 20 बाजार आते हैं जो 300 साल पुराने हैं और पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं।
चांदनी चौक, सदर बाजार, कनौट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राम मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज, दरियागंज इन बाजारों में रोजाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी, सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं और यहां से 3000 ट्रक रोजाना गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित NCR के 25 शहरों समेत देशभर के सभी राज्यों में माल ले जाते हैं।
31 अक्टूबर दोपहर से ही बसे और गाडियां दिल्ली बॉर्डर सिंधु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर पर आना शुरू हो सकती हैं और शाम से ही बहादुर शाह जफर मार्ग, JLN मार्ग पर बैरिकेडिंग लग सकती है, ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं। तो असर 1 नवंबर नहीं, 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सिर्फ 5000 से 7000 लोग आए थे तो 8 घंटे तक सेंट्रल दिल्ली जाम रही थी। अब आ रहे हैं 10 लाख लोग।
1 नवंबर की रैली की दिवाली बाद 10-11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई भी विघ्न ना पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए जहां 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।