HIGHLIGHTS
भारत ने मुरासु का दिया है नाम।
ये एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है- ढोल' या 'युद्ध का नगाड़ा'।
WMO और ESCAP समिति चक्रवात के नामों की सूची रखती है।
Severe Cyclonic Storm Murasu: भारत में मुरासु नामक साइक्लोन का खतरा मंडरा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने इस चक्रवाती तूफान को लेकर हर कोई डरा हुआ है। उधर, IMD ने भी इसे लेकर कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक, 2 नवंबर की आधी रात को मुरासु आंध्र प्रदेश के नेल्लोर-नरसापुर तट से टकराएगा। ऐसे में जानते हैं कि आने वाले इस चक्रवाती तूफान का नाम कैसे पड़ा और इसे ये नाम किस देश ने दिया है।
मुरासु का असर भारत के कई जिलों में पड़ने वाला है। आज और कल आंध्र प्रदेश के 5 जिलों के लिए बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस तूफान से न सिर्फ आंध्र प्रदेश बल्कि तेलंगाना, ओडिशा और तमिलनाडु में भारी बारिश की प्रबल संभावना है।
| चक्रवात | नाम देने वाला देश |
|---|---|
| ताउते | म्यांमार |
| यास | ओमान |
| गुलाब | पाकिस्तान |
| बिपरजॉय | बांग्लादेश |
| मिचौंग | म्यांमार |
| रेमल | ओमान |
| दाना | कतर |
| फेंगल | सऊदी अरब |
| शक्ति | श्रीलंका |
| मोंथा | थाईलैंड |
इस बार 'मुरासु' चक्रवात तूफान का नामकरण भारत द्वारा किया गया है। ये एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है- ढोल' या 'युद्ध का नगाड़ा'। प्राचीन समय में इस ताल वाद्य यंत्र का उपयोग मुनादी करने या प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लोगों को सतर्क करने के लिए किया जाता था।
बंगाल की खाड़ी में बना ये चक्रवाती तूफान (Cyclone Murasu) आंध्र प्रदेश के तट की ओर आगे बढ़ रहा है। इसके लैंडफॉल के दौरान 100 से 120 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका है।
| वर्ष | चक्रवात का नाम | नामकरण करने वाला देश |
|---|---|---|
| 2021 | ताउते (Tauktae) | म्यांमार |
| 2021 | यास (Yaas) | ओमान |
| 2021 | गुलाब (Gulab) | पाकिस्तान |
| 2021 | जवाद (Jawad) | सऊदी अरब |
| 2022 | असानी (Asani) | श्रीलंका |
| 2022 | सितरंग (Sitrang) | थाईलैंड |
| 2022 | मैंडूस (Mandous) | संयुक्त अरब अमीरात (UAE) |
| 2023 | बिपरजॉय (Biparjoy) | बांग्लादेश |
| 2023 | मिचौंग (Michaung) | म्यांमार |
| 2024 | रेमल (Remal) | ओमान |
| 2024 | असना (Asna) | पाकिस्तान |
| 2024 | दाना (Dana) | कतर |
| 2024 | फेंगल (Fengal) | सऊदी अरब |
| 2025 | शक्ति (Shakhti) | श्रीलंका |
| 2025 | मोंथा (Montha) | थाईलैंड |
भारतीय मौसम विभाग ने इस चक्रवात का नाम मुरासु इसलिए रखा ताकि लोग इसे आसानी से याद रख सकें और सतर्क रहें। आंध्र प्रदेश को प्रभावित करने वाले इस चक्रवात को तमिल नाम मिलना इस बात का संदेश देता है कि ऐसा नाम रखकर वे उस इलाके के लोगों को उनकी क्षेत्रीय भाषा के द्वारा सतर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, चक्रवात के नाम रखने की एक खास प्रक्रिया होती है। सबसे आसान नाम को ही चुना जाता है जो वहां के क्षेत्रीय लोगों से जुड़ा हो लेकिन व्यक्ति विशेष न हो।
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में बनने वाले साइक्लोन के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO और एशिया व प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) की समिति द्वारा तैयार सूची के आधार पर रखे जाते हैं।
इस सूची में 13 देशों द्वारा सुझाए गए नाम शामिल हैं, हर देश बारी-बारी से एक-एक चक्रवात के नाम सुझाकर रख देते हैं। ऐसे में जब-जब कोई नया चक्रवाती तूफान आता है तो उसे उस सूची में से एक नया नाम दे दिया जा है। ऐसे में इस बार 'मुरासु' नाम भारत की ओर से सुझाया गया नाम है।
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके से टकराने वाले मुरासु तूफान के बाद अब जो भी आगामी चक्रवात होगा उसका नाम 'अक्वान' होगा। अक्वानी अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है- ब्रह्मांड या संसार। ये शब्द ईरान द्वारा सुझाया गया है।
आज रात मुरासु चक्रवात आंध्र प्रदेश के तय से टकराएगा। इसके बाद सबसे भारी तबाही और अत्यधिक बारिश का खतरा प्रकाशम, नेल्लोर, बापटला, कृष्णा और गुंटूर जिलों में है। इसके इलावा तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ और कुछ दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में भी पड़ेगा।