शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से मची तबाही के बीच राहत राशि को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सियासी तनातनी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने केंद्र से 9000 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी, लेकिन केंद्र ने सिर्फ 433 करोड़ रुपये जारी किए। अब केंद्र द्वारा 2000 करोड़ की घोषणा का भाजपा श्रेय ले रही है, जबकि वास्तविक मदद अब तक नहीं पहुंची है।
खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 2023 की आपदा में हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने खुद 4500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता दी थी, जबकि केंद्र से मिली राशि बेहद कम थी। उन्होंने इसे हिमाचल के प्रति केंद्र की भाजपा सरकार का सौतेला व्यवहार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की मदद अब तक लंबित है और भाजपा सिर्फ श्रेय लेने की राजनीति कर रही है।
हिमाचल कई जिलों में भारी तबाही के मंजर
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून की बारिश ने कहर बरपाया है। बीते 32 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में बादल फटने की 16 घटनाएं दर्ज की गईं। अकेले मंडी जिले में 15 स्थानों पर बादल फटे हैं, जिससे 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। चंबा, किन्नौर, हमीरपुर और कुठाह जैसे क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं और 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और राष्ट्रीय राजमार्गों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। बारिश और भूस्खलन के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस आपदा से राज्य को अब तक हजारों करोड़ रुपये की क्षति हो चुकी है।
कांग्रेस ने केंद्र से मांगा तत्काल राहत पैकेज
मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अब तक की बकाया आपदा राहत राशि को तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को फोटो खिंचवाने और प्रचार से ऊपर उठकर वास्तविक सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे आपदा प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करें।
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खरगे के इस बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्ष और जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर केंद्र सरकार इस गंभीर आपदा में मदद के प्रति इतनी सुस्त क्यों है।