हाईकोर्ट में जज, वकील और दंपति। इमेज-एआई 
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पत्नी से अपने पुराने लिव इन रिलेशनशिप को छिपाना धोखा, हाईकोर्ट ने 50 लाख की एलिमनी

Jharkhand High Court Verdict: कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि पति ने दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप की बात पत्नी को नहीं बताई थी। हाईकोर्ट ने इसे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत धोखाधड़ी माना।

रंजन कुमार

Jharkhand High Court Latest Verdict: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और पारदर्शिता को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि शादी से पहले किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहना और इस बात को जीवनसाथी से छिपाना कानून की नजर में धोखाधड़ी है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने न केवल एक दंपति की शादी को रद्द किया, बल्कि पत्नी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए गुजारा भत्ते की राशि में भी भारी बढ़ोतरी की।

मामले की शुरुआत 2 दिसंबर 2015 को हुई थी, जब इस जोड़े की शादी हुई थी। मगर, खुशियों की उम्र बहुत छोटी निकली। शादी के महज 3 महीने बाद मार्च 2016 में पत्नी को ससुराल छोड़ना पड़ा। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति ने शादी से पहले दूसरी महिला के साथ अपने लिव इन रिश्ते की बात छिपाई थी। साथ ही उसने ससुराल वालों पर 15 लाख रुपये दहेज की मांग और शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप भी लगाए।

फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक का सफर

पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत शादी को धोखाधड़ी के आधार पर रद्द करने और गुजारा भत्ते के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पति सुनवाई में शामिल नहीं हुआ, जिसके बाद फैमिली कोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए शादी रद्द कर दी और 30 लाख रुपये का गुजारा भत्ता तय किया। पत्नी इस राशि से संतुष्ट नहीं थी। उसने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसके पति का पद और वेतन बहुत ऊंचा है, इसलिए उसे 1 करोड़ रुपये मिलने चाहिए।

हाईकोर्ट का फैसला

सुनवाई के दौरान जब पति ने झारखंड हाईकोर्ट में खुद का बचाव करने की कोशिश की और कहा कि उसे समन नहीं मिले थे तो हाईकोर्ट ने उसकी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि पति को पर्याप्त नोटिस दिए गए थे, लेकिन वह जानबूझकर पेश नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने माना कि शादी से पहले के लिव इन रिलेशनशिप को छिपाना जीवनसाथी के साथ विश्वासघात है। यह विवाह की नींव को कमजोर कर देता है। अदालत ने पति की वित्तीय स्थिति और संपत्ति का आकलन करने के बाद गुजारा भत्ते को 30 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यह राशि फरवरी 2026 से जून 2026 के बीच 5 समान किस्तों में चुकाई जाए।

डिग्री है, पर रोजगार नहीं

अदालत ने यह भी नोटिस किया कि पत्नी के पास एलएलबी (LLB) की डिग्री है, लेकिन वह बेरोजगार है। अपने खर्चों के लिए पिता पर निर्भर है। वहीं, पति उच्च पद पर कार्यरत है। वह आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम है। दोनों 2016 से अलग रह रहे थे, इसलिए कोर्ट ने इस रिश्ते को बेजान मानते हुए इसे खत्म करना उचित समझा।

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