Kolkata Rape Case में कोलकाता के एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। अब बीजेपी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में इस घटना को ममता सरकार की 'चिंताजनक असंवेदनशीलता' का बताया है। वहीं पुलिस जांच में भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर बंगाल सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये जा रहे हैं।
पुलिस ने साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज के दो मौजूदा छात्रों, एक पूर्व छात्र और एक गार्ड को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि छात्रा को कॉलेज परिसर के भीतर जबरन शराब पिलाई गई और फिर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। मामले में पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर क्राइम सीन भी रीक्रिएट किया।
नड्डा ने ममता सरकार उठाए सवाल बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पोस्ट में कहा कि उन्हें पार्टी की फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट मिल गई है। इस रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की बदहाली और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की हकीकत को रेखांकित किया गया है। नड्डा ने लिखा, "संदेशखली से लेकर आरजी कर अस्पताल और अब लॉ कॉलेज पैटर्न साफ है: चुप्पी, निष्क्रियता और अपराधियों को संरक्षण।
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राज्य प्रशासन द्वारा इस घटना को दबाने की कोशिश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने भी घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की और पुलिस की कार्रवाई में देरी हुई।
अपराधियों के खिलाफ जांच तेज, छात्रा की हालत स्थिर
पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें पूर्व छात्र और संविदा कर्मचारी मनोजीत मिश्रा, मौजूदा छात्र प्रमित मुखर्जी और जैब अहमद, और गार्ड पिनाकी बनर्जी शामिल हैं। इन्हें घटनास्थल पर ले जाकर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया ताकि जांच में सटीकता लाई जा सके।
वहीं पीड़िता की मेडिकल जांच हो चुकी है और उसकी काउंसलिंग जारी है। कॉलेज प्रशासन अब सहयोग कर रहा है लेकिन पहले हुई लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला सुरक्षा पर फिर बहस, जवाबदेही तय हो
कोलकाता में हुए इस जघन्य अपराध ने बंगाल की राजनीति और सामाजिक माहौल को झकझोर दिया है। विपक्ष इसे 'राज्य की गिरती कानून व्यवस्था' का उदाहरण बता रहा है जबकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं दिया है। सवाल यह है कि क्या यह मामला भी बाकी घटनाओं की तरह दबा दिया जाएगा या दोषियों को सजा मिलेगी?