वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चंटर्जी (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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डे स्पेशल: आज ही के दिन हुई थी उस गीत की रचना जिसने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें, जानिए स्वर्णिम इतिहास

7 नवंबर पहली ऐसी तारीख है जो किसी नेता, अभिनेता, क्रांतिकारी और वैज्ञानिक की जन्मदिन, जयंती या पुण्यतिथि के अलावा किसी और वजह से इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में रजत रोशनाई से लिखी गई है।

अभिषेक सिंह

नवभारत डेस्क: आज की तारीख यानी गुरुवार 7 नवंबर भारत के इतिहास में अमर है। यह पहली ऐसी तारीख है जो किसी नेता, अभिनेता, क्रांतिकारी और वैज्ञानिक की जन्मदिन, जयंती या पुण्यतिथि के अलावा किसी और वजह से इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में रजत रोशनाई से लिखी गई है।

7 नवंबर की तारीख को नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन की जयंती होती है तो वहीं इस तारीख को भारत के राष्ट्रगीत की वजह से भी जाना जाता है। आज ही के दिन साल 1876 में प्रसिद्ध भारतीय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना की थी। पहली बार इस गीत को उसी दिन बंगाल के कांताल पाडा गांव में गाया गया था।

अंग्रेजों के लिए क्रांति का स्वर

साधारण शब्दों में कहें तो आज हम भारतीय राष्ट्रीय गीत की 148वीं जयंती मना रहे हैं। वहीं, वंदे मातरम को पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। यानी भारत को आज़ादी मिलने से करीब 51 साल पहले। इस गीत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसने लोगों को आज़ादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया। यह अंग्रेजों के खिलाफ़ विरोध की आवाज़ थी।

यह गीत 1882 में बंकिम चन्द्र प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ का भी हिस्सा बना। मूलरूप से ‘वंदे मातरम’ के प्रारंभिक दो पद संस्कृत में थे, जबकि शेष गीत बांग्ला भाषा में है। अरविंद घोष ने इसका पहला इंग्लिश ट्रांसलेशन भी किया है। दिसम्बर 1905 में कांग्रेस कार्यकारिणी की मीटिंग में राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया गया। वहीं बंग भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा भी बना।

1923 में पहली बार गूंजे विरोधी स्वर

साल 1923 के कांग्रेस अधिवेशन में इस गीत के विरोध में भी स्वर गूंजे। जिसके बाद जवाहलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अब्दुल कलाम अजाद और आचार्य नरेन्द्र देव की समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता अधिवेशन में अपनी रिपोर्ट पेश की। जिसके बाद राष्ट्रगीत के गायन की अनिवार्यता को खत्म कर दिय गया। वहीं यह भी कहा गया कि इस गीत के शुरुआती दो पद ही प्रासंगिक हैं।

दुनिया का दूसरा लोकप्रिय गीत

कांग्रेस के इस अधिवेशन के बाद से यह उसी स्वरूप में गाया जा रहा है। वहीं, आजादी के बाद 1950 में 'वंदे मातरम' को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय गीत और 'जन गण मन' को राष्ट्रीय गान घोषित कर दिया गया। बीबीसी के एक सर्वे के मुताबिक वंदे मातरम दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत है। राष्ट्रगीत की पंक्तियां आप यहां भी गुनगुना सकते हैं;-

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,शस्यश्यामलाम्, मातरम्!वंदे मातरम्!शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥कोटि कोटि कण्ठ कल कल निनाद करालेद्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवालेके बोले मा तुमी अबलेबहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्मत्वं हि प्राणाः शरीरेबाहुते तुमि मा शक्ति,हृदये तुमि मा भक्ति,तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणीकमला कमलदल विहारिणीवाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्नमामि कमलां अमलां अतुलाम्सुजलां सुफलां मातरम्॥श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्धरणीं भरणीं मातरम्॥

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