अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (फोटो- सोशल मीडिया) 
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अगले दलाई लामा चीन से... CM खांडू का बयान, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश की भूमिका

अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने कहा है कि अगले दलाई लामा का चयन एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश किया जाएगा। CM ने कहा कि चयन की प्रक्रिया वर्तमान दलाई लामा के निधने के बाद ही शुरू होगी।

सौरभ शर्मा

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अगले दलाई लामा की खोज को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 15वें दलाई लामा का जन्म किसी स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में होगा, न कि चीन में। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन इस मुद्दे पर अपनी भूमिका जताने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि दलाई लामा की परंपरा एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसमें चीन जैसी असीमित शक्ति की व्यवस्था की कोई जगह नहीं।

मुख्यमंत्री ने एक न्यूज ऐजेंसी से बातचीत में बताया कि 14वें दलाई लामा पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्होंने स्वयं यह कहा है कि वे 130 साल तक जीवित रह सकते हैं। खांडू ने कहा कि अगली नियुक्ति की कोई भी जल्दबाजी नहीं है और यह प्रक्रिया वर्तमान दलाई लामा के निधन के बाद ही शुरू होगी। ट्रस्ट इस चयन प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा, जिसमें सभी धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन किया जाएगा।

'स्वतंत्र देश में होगा जन्म, चीन में नहीं'

पेमा खांडू स्वयं भी बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और दलाई लामा के अनुयायी हैं। उन्होंने कहा कि अगले दलाई लामा का जन्म किस क्षेत्र में होगा, यह अनुमान लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। केवल एक बात स्पष्ट है कि उनका जन्म एक स्वतंत्र दुनिया में होगा। उन्होंने कहा कि चीन इस मामले में बार-बार आपत्ति जताता है, जबकि दलाई लामा की परंपरा का चीन से कोई लेना-देना नहीं है। खांडू ने कहा, चीन में न तो यह परंपरा है और न ही इसकी समझ। यह परंपरा तिब्बती बौद्धों और हिमालयी क्षेत्रों की परंपरा है।

'600 वर्षों से चली आ रही है परंपरा'

मुख्यमंत्री ने बताया कि दलाई लामा परंपरा पिछले 600 वर्षों से जारी है और यह तिब्बती बौद्ध धर्म की एक अनूठी विरासत है। उन्होंने कहा कि 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिन से पहले सभी बौद्ध परंपराओं के प्रमुखों ने बैठक कर यह तय किया था कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी। खांडू ने उम्मीद जताई कि 14वें दलाई लामा का जीवन लंबा और स्वस्थ रहे। उन्होंने कहा, "हम प्रार्थना करते हैं कि वे 130 साल तक जीवित रहें और बौद्ध समाज का मार्गदर्शन करते रहें।

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