Election Commission SIR Controversy: चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मंगलवार को बैठक बुलाई गई है। इसमें केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव बनाने के लिए पार्टी की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस लगातार ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी एसआईआर के मुद्दे और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर गंभीरता से लड़ाई लड़ेगी। पार्टी का रुख बताते हुए खड़गे ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी और सदस्य अपने सुझाव देंगे।
कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2 चुनाव आयुक्तों की राय को नजरअंदाज किया। इससे साफ पता चलता है कि CEC, PM और HM के साथ मिलकर भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रहे थे। पूरे भारत में लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। बता दें कि सोमवार को 1000 से ज्यादा जगहों पर जिला कांग्रेस कमिटी के कार्यकर्ता ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि लोगों की आम भावना यह है कि 2024 का चुनाव 'चोरी का चुनाव' था, और ऐसा ही हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के चुनावों में भी हुआ।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि केरल के एक मुख्य सचिव ने भी कहा है कि CEC ने खुद उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा था। इसका मतलब है कि सबसे ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति बीजेपी की विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है और वह बीजेपी का कार्यकर्ता बन गया है। इसलिए यह साफ है। इसमें कोई शक नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। मल्लिकार्जुन ने आगे कहा, "अगर उनमें जरा भी नैतिक अधिकार बचा है, तो उन्हें उस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। और उसके बाद, इस्तीफा देने के बाद भी, हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।"
चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच ये बातें सामने आईं। विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR और चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। इन आपत्तियों में फॉर्म 6, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और वोटर लिस्ट के डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।