Sukhbir Singh Badal attacked in Nanded: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में आज गुरुवार को हमला हुआ। फिलहाल वे अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। उनके ऊपर हुए हमले के बीच सवाल उठ रहा है कि वे महाराष्ट्र क्यों गए थे? मराठों के गढ़ में सिखों के लिए ऐसी कौन-सी धार्मिक जगह है, जो उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। सिख समुदाय इसे ईश्वर का स्थान क्यों बताता है और इस स्थान से गुरु गोबिंद सिंह का क्या रिश्ता है।
सबसे पहले यह जान लें कि सुखबीर सिंह बादल पर जहां हमला हुआ वह महाराष्ट्र का नांदेड है। वह यहां गोदावरी नदी के किनारे स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब में परिवार के साथ आए थे। इसको सिख धर्म के पांच सबसे पवित्र और सर्वोच्च तख्तों में एस एक माना जाता है। यह स्थान सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और उनके अंतिम समय से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
सचखंड को आसान भाषा में समझें तो इसका अर्थ है 'सत्य का खंड' या फिर ईश्वर का निवास स्थान होता है। यह एक ऐतिहासिक स्थल है। साल 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन को पूरा किया था और ज्योति ज्योत में विलीन हो गए थे। पंजाब के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह ने यहां एक भव्य गुरुद्वारे का निर्माण करवाया था। 19वीं सदी में 1832 से 1837 के बीच इस गुरुद्वारे को तैयार किया गया था
बता दें कि सन 1708 में सिखों के दसवें और आखिरी गुरु- गुरु गोबिंद सिंह महाराष्ट्र के नांदेड़ आए थे और अपने अंतिम सांस तक यहीं रहे थे। अपने जीवन के अंतिम पलों में उन्होंने इस जगह को स्थायी निवास बना लिया था। नांदेड की इसी भूमि पर गुरु गोबिंद सिंह ने सिख पंथ को ऐतिहासिक आदेश दिया था कि उनके बाद कोई भी जीवित गुरु नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब ही सिखों के सदा के लिए आजीवन गुरु रहेंगे।
नांदेड़ के इस तख्त सचखंड श्री हजूर साबिह गुरुद्वारे का मुख्य कक्ष अंगीठा साहिब कहलाता है। इसे ठीक उसी जगह बनवाया गया है, जहां 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी का अंतिम संस्कार हुआ था। दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के शस्त्र और पविक्ष निशान यहां पर है।
नांदेड में स्थित इस तख्त पर गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े कई ऐतिहासिक अवशेष आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें उनकी तलवारें, तीर-कमान, ढाल और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं शामिल हैं, जिनके दर्शन के लिए देश और विदेश से लोग महाराष्ट्र पहुंचते हैं। यहां पर गुरु गोबिंद सिंह की मुलाकात माधव दास बैरागी से हुई थी, जिन्हें उन्होंने अमृत छकाकर बांदा सिंह बहादुर के रूप में नया नाम दिया और पंजाब में जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा था।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पंजाब के पूर्व सीएम अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ के तख्त श्री हजूर साहिब पहुंचे थे। जहां गुरुद्वारे के पास मौजूद एक निहंग सिख ने कृपाण से हमला कर दिया। हमलावर की पहचान जसपाल सिंह के रूप में हुई है, जो पिछले दो साल से गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में काम कर रहा था। हालांकि, उसने सुखबीर सिंह बादल पर क्यों क्यों किया यह स्पष्ट नहीं हो सका है। इस हमले में सुखबीर की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी के भी घायल होने की जानकारी है।