कांग्रेस नेता जयराम रमेश (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
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30 दिन जेल में रहे CM-PM तो जाएगा पद, कांग्रेस क्यों कर रही इस बिल का विरोध? मानसून सत्र से पहले सियासत तेज

Jairam Ramesh On Monsoon Session: मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने 130वें संविधान संशोधन बिल का विरोध करने का ऐलान किया है। जयराम रमेश ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।

अमन मौर्या

130th Constitutional Amendment Bill: मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने बड़ा ऐलान किया है। रविवार को राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि संसद में उनकी पार्टी उन सभी संविधान संशोधन विधेयकों का विरोध करेगी, जिसमें कोई मंत्री के किसी ऐसे आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक जेल पर पद से हटाने का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के पास मौजूदा समय में इस विधेयक को संसद में पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं है। इसीलिए वो कई क्षेत्रीय पार्टियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

बिल को बताया बेहद खतरनाक

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कांग्रेस नेता जयराम रमेश कई राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। मानसून सत्र से पहले भाजपा द्वारा संविधान बिल पर उन्होंने कहा कि वो 130वां संविधान संशोधन बिल लाने की कोशिश करेंगे, उसका हम विरोध करेंगे।

कांग्रेस नेता ने बताया कि यह एक खतरनाक बिल है। इसे 2025 के शुरुआत में भी पेश किया गया था और बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया था। उस दौरान ज्यादातर विपक्षी दलों ने इस बिल का बहिष्कार किया था।

क्या कहता है यह बिल?

जयराम रमेश ने बताया कि इस बिल के अनुसार, अगर कोई मंत्री किसी ऐसे आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है जिसमें पांच साल से ज्यादा की सजा हो सकती है, तो 31वें दिन उसे पद से हटा दिया जाएगा। यह बहुत अजीब बात है। मेरा मतलब है, अदालती कार्यवाही अभी भी चल रही है और भारत में, जब तक आरोप साबित न हो जाए, तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है। वे इस सत्र में, यानी मॉनसून सत्र के दौरान इसे फिर से पेश करने की कोशिश कर सकते हैं।

परिसीमन बिल पर शर्मिंदा हुए गृहमंत्री

बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता ने अप्रैल में विशेष संसद सत्र में लाए गए परिसीमन बिल पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 16-17 अप्रैल, 2026 को संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन बिल लाया गया था। 17 अप्रैल को गृह मंत्री को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि परिसीमन पर संविधान संशोधन के लिए पक्ष में केवल 298 सांसदों का वोट मिला, जबकि इसके लिए 352 वोटों की जरूरत थी।

क्षेत्रीय दलों तोड़फोड़ का लगाया आरोप

देशभर में क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों में चल रही टूट पर उन्होंने बताया कि 17 अप्रैल के बाद से ही वो अलग-अलग राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने TMC और शिवसेना को तोड़ा। ये टूट हमारे लिए एक चुनौती हैं। यह शिवसेना (UBT) के लिए एक झटका है, यह TMC के लिए एक झटका है और यह विपक्ष के लिए भी एक झटका है, लेकिन हमारी एकता और एकजुटता बनी हुई है। वो बहुमत जुटाने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं।

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