CJP-Congress Delhi Protest: 20 जुलाई (सोमवार) को आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। शुरुआत में यह विरोध NEET पेपर लीक मामले को लेकर था, लेकिन अब यह बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। संसद मार्च में उम्मीद से कहीं अधिक लोग पहुंचे, जिससे आंदोलन की ताकत और राजनीतिक असर दोनों बढ़ गए हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में जंतर-मंतर पर करीब एक हजार लोग जुट रहे थे। लेकिन सोनम वांगचुक के अनशन और उनकी बिगड़ती तबीयत की खबरों के बाद लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी। आयोजकों ने 20 हजार लोगों के आने की उम्मीद जताई थी, जबकि अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक संसद मार्च में कबीर 30 हजार से लेकर एक लाख तक लोग शामिल हुए। वहीं आज मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा मांग लेगी? सरकार का अगला कदम क्या होगा?
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी की मांग है कि शिक्षा मंत्री को धर्मेंद्र प्रधान NEET पेपर लीक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे। शुरुआत में यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक था, लेकिन संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कई विपक्षी दल खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आए है।
आज सुबह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी घायल छात्रों से मिले पहले दिल्ली के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे और फिर प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी ने भी समर्थन किया और कांग्रेस नेताओं के साथ धरने पर बैठे। हालांकि, इसके बाद पुलिस ने राहु-प्रियांका समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। पहले से ही छात्रों के आक्रोश का सामना कर रही मोदी सरकार के लिए विपक्ष इस प्रदर्शन ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कुछ बच्चों के घायल होने की भी खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति बढ़ी। इससे आंदोलन को पहले से अधिक जनसमर्थन मिलने लगा।
कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं है। पहली, सोनम वांगचुक को अस्पताल से तुरंत रिहा किया जाए। दूसरी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। तीसरी, आत्महत्या करने वाले NEET परीक्षार्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। हालांकि बैठक में इन मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के सामने अब कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इस्तीफे की बढ़ती मांग: पहले विरोध केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित था, लेकिन अब कुछ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। सोनम वांगचुक पर टिकी नजर: सोनम वांगचुक ने पुलिस कार्रवाई के बाद अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है। उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल ले जाने की अनुमति मिली है। माना जा रहा है कि यदि वे इलाज के बाद फिर जंतर-मंतर लौटते हैं, तो आंदोलन और अधिक तेज हो सकता है। संसद सत्र में हंगामे से नुकसान: मानसून सत्र के दौरान सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में थी। लेकिन आंदोलन और विपक्ष के विरोध के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। लोकसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी। इससे सरकार के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल होता दिख रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास दो प्रमुख विकल्प हैं। पहला, प्रदर्शनकारियों से बातचीत जारी रखकर कुछ मांगों पर सहमति बनाई जाए। दूसरा, शिक्षा मंत्री के विभाग में बदलाव या अन्य राजनीतिक फैसला लिया जाए। हालांकि, भाजपा आमतौर पर दबाव में इस्तीफा लेने से बचती रही है।