

Cockroach Janta Party Protest Impact On Govt: सोमवार, 21 जुलाई के दिन सेंट्रल दिल्ली में पूरे दिन हंगामे का मंजर देखने को मिला। संसद और जंतर-मंतर के आसपास की सभी सड़कें भीड़ से खचाखच भरी नजर आई। वहीं, कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शन कर युवाओं के बीच झड़प की घटनाएं भी हुईं। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर संसद भवन के नजदीक की लगभग सभी मेट्रो स्टेशन भी बंद रहे। बावजूद इसके लोगों की भीड़ में कोई कमी नजर नहीं आई। पुलिस की अनुमति न मिलने के बाद भी संसद मार्च जारी रहा, जिसको रोकने के लिए पुलिस ने कई जगहों पर बल का प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज शुरू कर दी।
देश के शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर की तरह के सवाल उठ रहे थे। कई बार ऐसा भी दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहे सीजेपी के फॉलोअर्स फेक हैं, यह सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित है...ग्राउंड पर इसका कोई अस्तित्व नहीं है। हालांकि, सोमवार के प्रदर्शन ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया।
स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों से लेकर अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चे बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर सरकार को सीधी चुनौती दिए की उनके सवालों और समस्याओं पर चुप्पी रखना अब मुमकिन नहीं होगा। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई की समस्या सिर्फ एजुकेशन सिस्टम में ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी, महंगाई जैसे अन्य मुद्दों को वे भी अनदेखा नहीं कर सकते।
सोमवार के शुरूआती हंगामे के बीच ऐसी खबर आई कि सरकार बातचीत के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों को बुलाया है। हालांकि, बाद में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की ओर से कहा गया कि बातचीत का प्रस्ताव प्रदर्शनकारियों की ओर से आया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 AM से ही हमारी बातचीत जारी है।
उन्होंने आगे लिखा कि सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में इतने बड़े प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने मुख्य मांगों को लेकर अभी तक कुछ जवाब नहीं दिया है। जिसके बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह प्रदर्शन सिर्फ शोर-शराबा था या जमीन पर भी इसका कुछ असर देखने को मिलेगा। आखिर, सड़क पर युवाओं उतरने से क्या हासिल हुआ? सीजेपी के आंदोलन को सपोर्ट कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि आज जंतर-मंतर पर जिस नई पीढ़ी को देख रहा हूं, उससे मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है। ये युवा सिर्फ अपने लिए नहीं लड़ रहे। वे ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं जो न्यायपूर्ण हो, ऐसी व्यवस्था के लिए जो नौकरी दे और ऐसी राजनीति के लिए जो जनता के प्रति जवाबदेह हो।
अब आते हैं अहम सवाल पर और वो ये है कि इस आंदोलन से सरकार की परेशानियां कितनी बढ़ने वाली है। सीनियर पत्रकार स्मिता शर्मा के हवाले से बीबीसी ने लिखा कि अगर सरकार इस आंदोलन से कुछ नहीं सीखती है तो ये उसकी बड़ी गलती होगी। क्योंकि युवाओं की भीड़ और जोश ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी हालत में संसद मार्च करना चाहते थे। अगर सीजेपी भी उन्हें रोकने की कोशिश करती, तो भी हजारों युवा जंतर-मंतर से संसद मार्च करते।
युवाओं पर बड़ी बेरहमी से लाठियां बरसाई गईं। बावजूद उसके वो पीछे नहीं हटे, डट कर पुलिसकर्मियों का सामना किया। सरकार के लिए यह एक अहम संकेत है कि अगर युवाओं के निराशा को नहीं सुना जाता है तो आज जिस तरह यह उग्र हुए हैं। आने वाले समय में इसका स्वरूप और भी प्रभावी हो सकता है। आने वाले समय में युवाओं का यह प्रदर्शन सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
स्मिता शर्मा ने आगे कहा कि इस प्रदर्शन से देश को यह हासिल हुआ कि केंद्र की मोदी सरकार अब तक लोगों को फॉर ग्रांटेड मान के चल रही थी, उसको वो भ्रम इस एक प्रदर्शन ने तोड़ दिया। ऐसा नहीं था कि लोग आए और चुपचाप चले गए। उन्होंने दिखाया कि भारत का जनतंत्र मजबूत है, उसकी जड़ें मजबूत हैं। सरकार उसे कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि सरकार के लिए यह अलॉर्मिंग बेल है। लंबे समय तक जनता को अंदेखा नहीं कर सकते। सरकार को जवाब देना होगा वरना आज भी लोग सड़कों पर आना नहीं भूले हैं। इसका असर भविष्य में दिखाई देगा।