सौरभ दास और आशुतोष रांका से जुड़े अनधिकृत प्रवेश के मामले को क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया
जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने से जुड़े मामले में आशुतोष रांका और सौरभ दास की हिरासत बढ़ाई गई।
सौरभ दास का बयान: तिहाड़ लौटते समय उन्होंने कहा, “हम आपातकाल में हैं। कोई इंसाफ नहीं है। यह पुलिस कोर्ट है।”
Ashutosh Ranka, Saurav Das Case: CJP नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती हुईं दिख रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि सौरभ दास और आशुतोष रांका से जुड़े अनधिकृत प्रवेश के मामले को क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया है। अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच करेगी। इससे पहले CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद तिहाड़ जेल लौटते समय सौरभ दास ने पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बंद गाड़ी के अंदर से उन्होंने जोर से कहा, “हम आपातकाल में हैं। कोई इंसाफ नहीं है। यह पुलिस कोर्ट है। जरा देखिए, उन्होंने क्या हाल बना दिया है।”
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने से जुड़े मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पुलिस का पक्ष है कि संबंधित प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर प्रतिबंध लागू थे।
सोमवार को पांच दिन की हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई।
सीजेपी नेताओं के वकील अभिक चिमनी ने कहा कि पिछली हिरासत अवधि पूरी होने पर वे नई जमानतें लेकर अदालत पहुंचे थे। उनके मुताबिक, पिछली सुनवाई में अदालत ने पहले पेश किए गए जमानतदारों को स्वीकार करने योग्य नहीं माना था।
वकील ने दावा किया कि सुनवाई शुरू होने के बाद राज्य पक्ष ने एक नई अर्जी दाखिल की और न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। उनके अनुसार, राज्य पक्ष ने सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को तत्काल खतरा होने का तर्क दिया। बचाव पक्ष ने इस दलील पर आपत्ति जताई।
सीजेपी की न्यायिक मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानतदारों को खारिज करने और हिरासत बढ़ाने की कार्रवाई उचित नहीं थी।
रत्ना सिंह के मुताबिक, जमानतदार के सत्यापन की प्रक्रिया किसी व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में भेजने का वैध आधार नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीजेपी नेताओं की ओर से कोई उकसावा नहीं हुआ था और इसके बावजूद उनकी हिरासत दो दिन बढ़ा दी गई।