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Budget 2026: मनरेगा पर लगा मोदी का ब्रेक...फिर निर्मला ने क्यों दे दिए 30 हजार करोड़, VB-G RAM G का क्या हुआ?

Why Fund Allocated to MGNREGA: मनरेगा योजना इतिहास बनने जा रही है और उसकी जगह एक नई और दमदार योजना VB-G RAM G ने ले ली है। इसके बावजूद बजट में निर्मला सीतारमण ने मनरेगा को 30 हजार करोड़ का फंड दिया है

अभिषेक सिंह

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए गए बजट 2026-27 में ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब बरसों पुरानी मनरेगा योजना इतिहास बनने जा रही है और उसकी जगह एक नई और दमदार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G ने ले ली है। सरकार ने इसके लिए खजाना खोलते हुए 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया है।

सरकार ने इस नई योजना के लिए कुल 95,692.31 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया है। हालांकि, बजट भाषण में इसका नाम नहीं लिया गया, लेकिन दस्तावेजों में यह बड़ी राशि इसी के लिए है। जब तक यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक पुरानी मनरेगा योजना चलती रहेगी। इसके लिए भी अगले वित्तीय वर्ष के लिए 30,000 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं ताकि गांवों में काम न रुके।

125 दिन रोजगार की पक्की गारंटी

संसद ने पिछले साल दिसंबर में ही VB-G RAM G एक्ट, 2025 को हरी झंडी दे दी थी। यह कानून 20 साल पुराने मनरेगा एक्ट, 2005 की जगह लेगा। सबसे खास बात यह है कि नई योजना में अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 नहीं, बल्कि 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी।

क्या है नई योजना का मकसद?

इस योजना का मकसद ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनाना है। सरकार की नजर विकसित भारत @2047 के सपने पर है, जिसे पूरा करने के लिए ग्रामीण इलाकों में विकास और योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह नई पहल पुरानी कमियों को दूर कर गांव के ढांचे को मजबूत करेगी।

बदल गया पैसे देने का पूरा गणित

पुरानी मनरेगा योजना में मजदूरी का 100 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब नियम बदल गए हैं। VB-G RAM G एक केंद्र प्रायोजित योजना है, इसलिए इसमें फंड शेयरिंग का तरीका अलग होगा। अब नई व्यवस्था के तहत सामान्य राज्यों के लिए केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार को अपनी जेब से 40 फीसदी पैसा मिलाना होगा।

वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 का होगा। जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां केंद्र सरकार पूरा 100 फीसदी खर्च उठाएगी। आंकड़ों की बात करें तो 1 फरवरी तक 5.01 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम लिया है। संशोधित अनुमानों में मनरेगा का बजट भी बढ़ाकर 88,000 करोड़ कर दिया गया था।

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