India BRICS Summit 2026: भारत शनिवार से राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। दो दिवसीय यह सम्मेलन रविवार तक चलेगा। इसमें BRICS सदस्य और साझेदार देशों के नेता, साथ ही आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन के दौरान नेता आपसी हित से जुड़े वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। साथ ही साझा प्राथमिकताओं पर BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होगी।
भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य BRICS की रणनीतिक साझेदारी को तीन प्रमुख स्तंभों-राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध-के आधार पर मजबूत करना रहा।
इन बैठकों के साथ बिजनेस-टू-बिजनेस और लोगों के बीच संपर्क से जुड़ी पहलों के जरिए भारत की अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-केंद्रित परिणामों के माध्यम से BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार संगठन की अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। यह वर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS के गठन को 20 साल पूरे हो रहे हैं।
भारत की अध्यक्षता के लिए तैयार किए गए BRICS लोगो में परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाया गया है। इसकी पंखुड़ियों में सदस्य देशों के जीवंत रंगों को शामिल किया गया है, जो सामूहिक शक्ति और एकता का प्रतीक हैं। वहीं, केंद्र में ‘नमस्ते’ की मुद्रा भारत की गर्मजोशी, सम्मान और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की भावना को दर्शाती है।
BRICS में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
वहीं, BRICS के साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।
BRICS के भीतर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे, व्यापार और विश्व व्यापार संगठन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत की अध्यक्षता में भी इन क्षेत्रों में व्यावहारिक और साझा हितों पर आधारित सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)