लोकसभा में बिल पारित (सौजन्य-IANS) 
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हंगामे के बीच लोकसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल पास, अब बदल जाएंगे नियम; सोमवार तक कार्यवाही स्थगित

Birth and Death Registration Bill: लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) बिल पास कर दिया। नया कानून देरी से जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन के लिए सख्त नियम लाता है।

प्रिया जैस

Birth and Death Registration Amendment Bill: लोकसभा में एक बार फिर विपक्ष के हंगामे के कारण शुक्रवार 31 जुलाई को बिना किसी चर्चा के 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' पारित हो गया। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे और लगातार नारेबाजी के बीच शुक्रवार को सदन ने 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' को मंजूरी दे दी।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की ओर से पेश इस विधेयक को पेश किया गया था, जिसे 'ध्वनि मत' से पारित किया गया। बाद में लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो कई सदस्यों ने अपनी बात रखी। नित्यानंद राय ने 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' के लिए सदन की सहमति मांगी और शोर-शराबे के बीच बिना किसी चर्चा के इसे कुछ ही मिनटों में पारित कर दिया गया।

लोकसभा से पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक

इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में और संशोधन करना है। नए विधेयक के जरिए सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

इसमें प्रावधान है कि अगर किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल बाद, लेकिन दो साल के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो इसे सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी से ही पंजीकृत किया जा सकेगा। विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को सख्त बनाने और जन्म-मृत्यु की समय पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ये संशोधन लाए गए हैं।

किरेन रिजिजू ने की विपक्ष की निंदा

विधेयक पेश किए जाने के समय सदन में हंगामे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की निंदा की। उन्होंने कहा कि जब सदन में राष्ट्रीय महत्व के विधेयक लाए जा रहे हों, तो उन्हें व्यवधान पैदा करने वाले तरीकों से बचना चाहिए।

जनता ने विपक्ष को चर्चा के लिए संसद भेजा

रिजिजू ने विपक्षी सदस्यों से कहा, "लोगों ने आपको महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर चर्चा-विचार-विमर्श करने और कानून बनाने के लिए संसद भेजा है। आप कानून पर चर्चा में शामिल नहीं होते और फिर जनता के बीच जाकर दावा करते हैं कि सरकार सदन में जबरदस्ती विधेयक पारित करवा रही है।" उन्होंने कहा, "यह सही नहीं है, आपको चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।"

पीठासीन दिलीप सैकिया ने विपक्ष के हंगामे पर कहा कि किरेन रिजिजू ने सभी से बार-बार अनुरोध किया है कि सदन चलने दें। बैठक में विपक्ष ने इस विधेयक को समर्थन दिया था, लेकिन सदन में आपके सहयोग के बिना बिल पास करना पड़ा है। इसके बाद, दिलीप सैकिया ने विपक्ष के सदस्यों से अनुरोध किया कि सदन चलाने में सहयोग करें। इसके बाद हंगामा नहीं रुकने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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