नई दिल्ली: 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर केंद्र सरकार ने बीते बुधवार को अपनी मंजूरी दे दी। सभी राजनीतिक दलों से इस प्रतिक्रिया आ रही है। कई पार्टियों के नेता इसके समर्थन में हैं तो कई इसके विरोध में है। वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' का विरोध किया है। उन्होंने इसे बीजेपी का जुमला बताया है।
केजरीवाल ने गुरुवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 'वन नेशन वन इलेक्शन’ को बीजेपी का जुमला बताया। उन्होंने कहा, देश में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ होनी चाहिए। ताकि जो शिक्षा करोड़पति के बच्चों को मिलती है, वही आम आदमी के बच्चों भी मिल सके। देश में ‘वन नेशन वन इलाज’ होना चाहिए।
हर महीने चुनाव की मांग
केजरीवाल ने आगे कहा कि मैं कहता हूं कि हर महीने चुनाव होने चाहिए। ऐसे में नेता जनता के काबू में रहेंगे। क्योंकि जब चुनाव होता है, तभी नेता जनता के काबू में रहते हैं और उनका काम करते हैं और उनके सामने हाथ जोड़ कर खड़े रहते हैं।
'वन नेशन वन इलेक्शन' पर केजरीवाल की प्रतिक्रिया
शीतकालीन सत्र में की जा सकती है पेश
केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की उच्च स्तरीय रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगा दी है। इसकी सूचना बुधवार को सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी की इस रिपोर्ट को संसद के शीतकालीन सत्र में एक देश एक चुनाव विधेयक सदन में पेश किया जा सकता है।
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विरोध में खरगे ने क्या कहा
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले का विरोध किया है। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है और इससे काम नहीं चलने वाला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह फैसला लिया गया है