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12 साल का इंतजार खत्म! आंध्र प्रदेश को मिली नई राजधानी, लोकसभा में पास हुआ आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन बिल

Andhra Pradesh Reorganisation Amendment Bill 2026: लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 पास कर अमरावती को स्थायी राजधानी का दर्जा दिया, वहीं YSR कांग्रेस ने विरोध में वॉकआउट किया।

सजल रघुवंशी

Amravati New Capital Of Andhra Pradesh: लोकसभा ने बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को पास कर दिया है। इस बिल के जरिए अमरावती को रज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा मिलेगा। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बिल पेश किया था। इस पर एक घंटे से ज्यादा बहस हुई जिसके बाद इसे वॉयस वोट से मंजूरी दे दी गई। बिल को अधिकतर दलों का समर्थन मिला लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

वाईएसआर कांग्रेस का आरोप था कि इस बिल में उन किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिन्होंने अमरावती को राजधानी बनाने के लिए अपनी जमीन दी थी।

वाईएसआर कांग्रेस ने बिल का किया विरोध

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद पीवी मिधुन रेड्डी ने इस बिल को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का राज्य पर क्या असर पड़ेगा इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। भारतीय जनता पार्टी सांसद सी.एम. रमेश ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमरावती को राजधानी बनाने के मुद्दे पर पार्टी का रुख विरोधाभासी नजर आता है।

अमरावती होगी राज्य की नई राजधानी

दरअसल, यह बिल आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 5 में बदलाव से संबंधित है। मूल कानून में हैदराबाद को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी के रूप में 10 वर्षों के लिए तय किया गया था लेकिन स्थायी राजधानी को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। नए संशोधन के जरिए अमरावती को राज्य की स्थायी और एकमात्र राजधानी घोषित किया जाएगा, जिससे इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्टता आ जाएगी।

12 साल का इंतजार खत्म

करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद आंध्र प्रदेश को अपनी स्थायी राजधानी मिल गई है। अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता देने वाला बिल बुधवार को लोकसभा से पारित हो गया। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी, जिसे सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला।

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