Amaravati Republic Day 2026: आंध्र प्रदेश के इतिहास में 26 जनवरी का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। राज्य के विभाजन के बाद पहली बार राजधानी शहर अमरावती में आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। हाई कोर्ट बिल्डिंग के पास हुए इस गरिमामयी कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित कई दिग्गजों ने शिरकत की।
आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती ने रविवार को अपना पहला आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह मनाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 77वें गणतंत्र दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने मुख्य सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। समारोह का आयोजन अमरावती स्थित हाई कोर्ट बिल्डिंग के पास किया गया, जो अब शहर की नई पहचान बन रही है।
इस खास मौके पर मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सबसे भावुक झलक तब देखने को मिली जब राजधानी शहर प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन स्वेच्छा से देने वाले किसानों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। उनके साथ कैबिनेट मंत्री और हाई कोर्ट के जज भी इस गौरवशाली पल के गवाह बने। राज्यपाल ने भारतीय सेना, स्पेशल पुलिस, सीआरपीएफ, केरल आर्म्ड पुलिस, एनसीसी और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स सहित कुल 11 टुकड़ियों के मार्च पास्ट से सलामी ली।
गणतंत्र दिवस की परेड का मुख्य आकर्षण राज्य सरकार की विभिन्न विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित 22 भव्य झांकियां रहीं। इन झांकियों के माध्यम से आंध्र प्रदेश के भविष्य और आधुनिक तकनीक के संगम को प्रदर्शित किया गया। झांकियों में मुख्य रूप से 'जीरो गरीबी', जनसंख्या प्रबंधन और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को दर्शाया गया।
इसके अलावा, जल सुरक्षा, किसान-एग्री टेक और ग्लोबल-बेस्ट लॉजिस्टिक्स जैसी झांकियों ने राज्य की आर्थिक मजबूती का संदेश दिया। ऊर्जा क्षेत्र में लागत अनुकूलन और जीवन के हर क्षेत्र में 'डीप टेक' के बढ़ते उपयोग को भी कलाकृतियों के माध्यम से बखूबी दिखाया गया। परेड में 'स्वच्छ आंध्र' अभियान की सफलता और उत्पाद पूर्णता जैसे विषयों को शामिल कर सरकार की प्राथमिकताओं को जनता के सामने रखा गया।
साल 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद से अब तक गणतंत्र दिवस समारोह मुख्य रूप से विजयवाड़ा में आयोजित किया जाता रहा है, क्योंकि राज्यपाल का आधिकारिक निवास वहीं स्थित है। अमरावती में इस आयोजन का होना शहर के पुनरुत्थान का प्रतीक माना जा रहा है। टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद राजधानी के विकास कार्यों को नई गति दी है।
गौरतलब है कि इससे पहले पांच साल तक राजधानी के विकास को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, क्योंकि पिछली वाईएसआर कांग्रेस सरकार ने तीन राजधानियों का प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता संभालते ही अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 'अमरावती' पर दोबारा काम शुरू कर दिया है, जिसकी नींव उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल (2014-19) के दौरान रखी थी।
यह समारोह ऐसे समय में हुआ है जब अमरावती को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर बड़ी तैयारियां चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, संसद के आगामी बजट सत्र में अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा देने के लिए एक महत्वपूर्ण बिल पेश किया जा सकता है। वर्तमान में राजधानी शहर के निर्माण कार्य पूरी तेजी से चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में टीडीपी संसदीय दल की बैठक में स्पष्ट किया कि अमरावती के निर्माण कार्यों में न केवल तेजी लाई गई है, बल्कि विकास का दूसरा चरण भी जल्द ही शुरू होने वाला है। सरकार का लक्ष्य अमरावती को एक विश्वस्तरीय आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जो निवेश और रोजगार का प्रमुख केंद्र बन सके। पहली बार आयोजित हुए इस गणतंत्र दिवस समारोह ने राज्य की जनता के बीच यह विश्वास जगाया है कि अमरावती अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर आंध्र प्रदेश के गौरव के रूप में खड़ी हो रही है।